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Wednesday, February 1, 2023

वैरिकोज खतरनाक बीमारी कैसे : आचार्य आर पी पांडेय

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वैरिकोज खतरनाक बीमारी कैसे : आचार्य आर पी पांडेय

अयोध्या। सामान्य रूप से देखें तो वैरिकोज वेन्स पैरों की नसों में सूजन को कहते हैं लेकिन असल में ये एक खतरनाक बीमारी है। वैरिकोज वेन्स को वैरिकोसेस और वैरिकोसिटिज भी कहते हैं। इस रोग में पैरों की नसें फैली हुई, बढ़ी हुई और फूली हुई नजर आती हैं। कई बार तो इन नसों में इतनी सूजन आ जाती है कि ये पैरों से बाहर उभर आती हैं। वैरिकोज वेन्स में अमूमन नसों में बहने वाले ब्लड का रंग बदला दिखाई देता है।

इस दौरान ये गहरी नीली, बैंगनी और लाल रंग की नजर आ सकती हैं। वैरिकोज वेन्स में पैरों में खूब दर्द होता है। युवावस्था के समय या इसके बाद लगभग 25 प्रतिशत लोगों को ये समस्या आमतौर पर होती है। वैरिकोज वेन्स की समस्या पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को प्रभावित करती है।


जब हाथ की नसे ( शिराएं ) फूल जाती हैं तो इसमें दर्द उत्पन्न होता है। यह शिराओं में अवरोध होने से होता है। इसको शिरो, ब्रह्म, सुषुम्ना नाड़ी, चक्रवात वाहिनी, स्नायु वात बस्ती और वात कुंडलिका आदि नामों से जाना जाता है। वेरीकोज़ वेन अर्थात पैरों की पिण्ड़लियों के पीछे नसो का गुच्छा बन जाना जो देखने में तो बहुत खराब लगता ही है साथ ही साथ रोगी को पैरों में खिंचाव और दर्द की भी अनूभूति देता है। बहुत से मित्र हमसे इस समस्या के स्थायी हल के लिये पूछते हैं इस पोस्ट में, हम आप सभी के लाभार्थ एक बहुत ही कारगर उपाय बता रहे हैं जो बहुत से लोगो ने प्रयोग किया है और लाभ बताया है।


हाँलाकि यह रोग कोई विशेष समस्या तो नही पैदा करता है किंतु कई बार कुछ अन्य छोटी-मोटी समस्याओं का कारण बन सकता है। ऑपरेशन द्वारा इसका समाधान किया जा सकता है किंतु जो मित्र ऑपरेशन नही करवाना चाहते उनके लिये प्रस्तुत है नीचे चमत्कारी घरेलू प्रयोग।


कैसे होता है वैरिकोज वेन्स
वैरिकोज वेन्स तब होता है जब नसें ठीक से काम नहीं कर पाती हैं। पैरों से ब्लड को नीचे से ऊपर हार्ट तक ले जाने के लिए पैरों की नसों में वाल्‍व होते हैं, इन्हीं की सहायता से ब्लड ग्रेविटेशन के बावजूद हार्ट तक पहुंच पाता है। लेकिन अगर ये वाल्व खराब हो जाए या पैरों में कोई समस्या आ जाए, तो ब्लड ठीक से ऊपर चढ़ नहीं पाता और पैरों में ही जमने लगता है। ब्लड के जमने की वजह से पैरों की नसें कमजोर हो जाती हैं और फैलने लगती हैं। कभी-कभी नसें अपनी जगह से हट जाती हैं और मुड़ने लगती हैं। इसी समस्या को वैरिकोज वेन्स कहते हैं।


क्यों दिखती हैं नसें नीली
दरअसल हमारे ब्लड में हीमोग्लोबिन नाम का तत्व पाया जाता है, जिसके कारण इसका रंग लाल दिखता है। हीमोग्लोबिन की विशेषता ये है कि ये कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन दोनों ही इसके साथ अच्छे से घुल-मिल जाते हैं। अगर हमारे टिशूज में कार्बन डाइऑक्साइड आ जाए, तो ये हीमोग्लोबिन के साथ रिएक्शन करके कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन बना लेता है। कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन वाले खून को ही हम खराब खून या अशुद्ध खून कहते हैं। इस अशुद्ध खून का रंग नीला या बैंगनी हो जाता है। हमारी नसों के ऊपर की स्किन बेहद पतली होती है इसी लिए नसें ऊपर से दिखाई देती हैं। अगर इन्हीं नसों में ये अशुद्ध खून भर जाता है, तो हमें बाहर से नसें गहरे नीले रंग की दिखने लगती हैं।


वेरिकोज वेन के होने के मुख्य कारण :
शारीरिक श्रम की कमी,अचानक से शरीर में होने वाले हार्मोन परिवर्त,उम्र का बढ़न,आनुवांशिक
वैरिकोज वेन्स के लक्षण
वैरिकोज वेन्स सबसे ज्यादा पैरों को प्रभावित करते हैं। नसों का त्वचा से बाहर उभर आना नसों में सूजन आना नसों में तेज दर्द होना नसों का रंग नीला या बैंगनी हो जाना नसों का रंग अचानक से बदलने लगना नसों का फैलने लगना नसों में छाले जैसा उभार आ जाना नसें में दबाव महसूस होना या ज्यादा ब्लड फ्लो होने लगना कई बार रक्त के दबाव के कारण नसें फट भी जाती हैं और खून निकलने लगता है।

किन कारणों से होता है वैरिकोज वेन्स इस रोग की सबसे बड़ी वजह जीवनशैली और अनहेल्दी खान-पान है। कई बार प्रेगनेंसी की वजह से भी वैरिकोज वेन्स हो जाता है। ऐसी स्थिति में तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और उनसे राय लेनी चाहिए क्योंकि इससे आपके बच्चे को भी खतरा हो सकता है। वैरिकोज वेन्स का खतरा पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को होता है क्योंकि इसकी एक वजह मासिक धर्म भी है। इसके अलावा ज्यादा देर तक खड़े रहने से, बढ़ती उम्र के कारण, और कई बार अनुवांशिक कारणों से भी वैरिकोज वेन्स हो सकता है। मोटापा भी इस रोग की एक बड़ी वजह है।


वेरिकोज वेन के लिए घरेलू उपाय :
मेथी : 5 से 10 ग्राम मेथी के बीज सुबह-शाम गुड़ के साथ मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है और हाथ की नड़ी (शिरा) अपने जगह पर ठीक रहती है। रोगी की शिराओं को फूलने से रोकने के लिए मेथी को पीसकर उसका लेप शिराओं पर लगाकर उसको कपड़े से बांध दें।
गोरवा (एकसिरा) : गोरवा (एकसिरा) का फल कमर में बांधने से शिरास्फिति में लाभ मिलता है। इसका प्रयोग रोजाना करने से शिरा का फूलना बन्द हो जाता है।


लाजवन्ती : लाजवन्ती को पीसकर बांधने से शिरास्फीति के रोग में लाभ मिलता है।
कटकरंज : कटकरंज के बीजों का चूर्ण एरण्ड के पत्ते पर डालकर शिरास्फिति पर बांधने से शिरा के रोगी का रोग दूर हो जाता है।
वेरिकोज वेन के लिए चमत्कारी पेस्ट :
आवश्यक सामग्री :
1/2 कप एलोवेरा का गूदा
1/2 कप कटी हुयी गाजर
10 ml सेब का सिरका
बनाने विधी :
मिक्सी में उपरोक्त तीनों सामानों को एकसाथ ड़ालकर अच्छे से पीसकर पेस्ट तैयार कर लें।
प्रयोग विधी :
वेरीकोज वेन वाले हिस्से पर इस पेस्ट को फैलाकर, सूती कपड़े से बहुत ही हल्की पट्टी बाँध दें । अब एक सीधी जगह पर पीठ के बल लेट जायें और पैरों को शरीर के तल से लगभग एक-सवा फुट ऊपर उठाकर किसी सहारे से टिका लें। इस अवस्था में लगभग तीस मिनट तक लेटे रहें। यह प्रयोग रोज तीन बार करना है।


वेरिकोज वेन में भोजन तथा परहेज :
शिरास्फिति के रोगी को खाने में बेसन की रोटी और घी का प्रयोग करें। इससे रोगी के रोग ठीक करने में सहायता मिलती है।
वेरीकोज़ नसों का दर्द एक ऐसा दर्द है जो पैरों की त्वचा के नीचे की तरफ होता है। इसे हलके में नहीं लिया जाना चाहिए। यह इस बात का संकेत है कि आप किसी गंभीर बीमारी के शिकार हैं। नस के रोग, पैरों में काफी दर्द रक्त संचार के ठीक से ना होने का भी संकेत होता है।


शुरुआती चरण से सावधानी बरतें :
आये जानें कि वेरिकोज़ नसों के होने का कारण क्या होता है। हम जानते हैं कि धमनियों में रक्त का प्रवाह होता है जिसमें ऑक्सीजन मौजूद होता है और धमनियां ऑक्सीजन रहित खून को दिल और फेफड़ों तक पहुंचाती हैं। नसों के अन्दर के वाल्व्स निरंतर खून का संचार करने का काम करते रहते हैं। पर अगर नसें कमज़ोर हैं तो ये फट जाती हैं और इनसे खून रिसने लगता है। इससे आपको सूजे हुए नस, पैरों में दर्द का अहसास होता है। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा होती है, क्योंकि महिलाओं में गर्भावस्था की स्थिति आने के कारण कुछ हॉर्मोन् का उत्पादन ज्यादा होता है।

ये वाल्व्स मोटापे या ज़्यादा देर तक खड़े रहने की वजह से भी प्रभावित हो सकते हैं। अगर आपको भी यह समस्या है तो हॉर्स चेस्टनट के बीज का अंश लें जो कि इस दर्द के लिए काफी प्रभावी होते हैं। पैरों में नसों को दिखने से बचाने के लिए मेकअप का सहारा लें। वेरिकोज़ नसों की समस्या को ठीक करने के प्राकृतिक उपाय ढूँढें.


जब हमारे वाल्व्स कमज़ोर हों तो रक्त बहने से निरंतर पैरों की दीवारों पर दबाव पड़ता है। इससे ये चौड़े हो जाते हैं और सूजन पैदा हो जाती है। इस समस्या का वैज्ञानिक नाम वेनस इनसफीशियेंसी होता है। यह समस्या महिलाओं में काफी सामान्य रूप से पायी जाती है। इस समस्या का एक और मुख्य कारण आनुवांशिक रूप से कमज़ोर वाल्व्स हैं। पैरों के छाले और संक्रमण से खुद को बचाने के लिए इसका समय समय से उपचार किया जाना आवश्यक है।

इस समस्या से ग्रसित मरीजों को कोई भी मेहनत का काम नहीं करना चाहिए। हल्की चहलकदमी करें क्योंकि इससे रक्त की धमनियां मज़बूत होंगी। लम्बे समय तक गर्म पानी में सॉना ना लें, गर्म वैक्स का प्रयोग ना करें और धूप में लम्बे समय तक ना रहें। सूजे हुए नस का इलाज, पैरों के नीचे एक तकिया लेकर लेटें। इससे पैरों से लेकर दिल तक रक्त का अच्छे से संचार होता है।


वेरिकोज़ नसों से दूर रहने का उपाय :
अगर आप इस समस्या से गुज़र रहे हैं तो इलास्टिक स्टॉकिंग या पट्टियों का प्रयोग ना करें। इनसे आगे जाकर आपके पैरों की अवस्था और भी खराब हो जाएगी। अगर आपको लम्बे समय से कब्ज़ की समस्या है तो इसे दूर करने के उपाय करें, क्योंकि इससे धमनियों और पैरों पर दबाव पड़ता है। अगर आप कहीं लम्बे समय के लिए घूमने निकल रहे हैं तो अपने साथ ब्लड थिनर्स ले लें जिससे पैरों में खून का थक्का जमने की समस्या उत्पन्न ना हो। हमेशा पोषक पूरक आहार लें, जो इस बीमारी के मरीजों के लिए काफी ज़रूरी है। रक्त के संचार को सुचारू रूप से चलाने और दीवारों को मज़बूत रखने के लिए विटामिन बी, विटामिन सी और इ तथा जिंक का सेवन भी करें। आप आयुर्वेदिक नुस्खों की मदद से भी इस समस्या से निपट सकते हैं।
लक्षणों से सावधान रहें :
अगर आपको शारीरिक समस्याओं का अच्छे से उपचार करना है तो इस बीमारी की निशानियों से बचकर रहें और तुरंत इनका हल निकालें।


वेरिकोज़ नसें दर्दनाक होती हैं :
वेरिकोज़ नसें शरीर में हॉर्मोन के परिवर्तन की वजह से जन्म ले सकती हैं। बर्फ सूजी नसों पर जादुई काम करता है। यह रक्त की धमनियों को सिकोड़ने का काम करता है। अतः दिन में जितनी बार हो सके बर्फ का प्रयोग करें। आप कम्प्रेशन स्टॉकिंग की मदद से भी इस समस्या का समाधान कर सकते हैं। इन स्टॉकिंग से त्वचा कस जाती है।

धमनियों को बाहर से सहारा
देने पर दिल की तरफ रक्त का संचार करना काफी आसान हो जाता है। अतः इस दर्द को कम करने के लिए कुछ उपाय किये जाने ज़रूरी हैं। सबसे ज़रूरी है स्वास्थ्यकर जीवन जीना। उम्र बढ़ने की वजह से भी यह समस्या हो सकती है। धमनियों की कमज़ोरी से आपका चलना फिरना दूभर हो सकता है। अतः अपने स्वास्थ्य की बराबर जांच करते रहें और इन लक्षणों के शुरूआती चरण को नज़रअंदाज़ ना करें।
अगर इन सब बचाव उपायों के बाद भी आप इस समस्या से बच ना पाए तो घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करें।
वैरिकाज वेंस के घरेलु उपाय :

  1. सेब का सिरका :

    यह वेरीकोज नसों का बेहतरीन इलाज है। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से साफ़ करता है और रक्त के प्रवाह और संचार में सहायता करता है। जब आपका रक्त स्वाभाविक रूप से बहता है तो धमनियों का भारीपन और सूजन काफी हद तक कम हो जाता है।

    शुद्ध सेब के सिरके को अपनी नसों के ऊपर की त्वचा पर लगाएं और अच्छे से मालिश करें। इसका प्रयोग रोज़ सोने से पहले और उठने के बाद करें। इस विधि का प्रयोग कुछ महीनों तक करें और अपनी धमनियों का आकार कम करें।

    आप 2 चम्मच सेब के सिरके का मिश्रण एक गिलास पानी में करके इसका सेवन भी कर सकते हैं। अच्छे परिणामों के लिए दिन में 2 बार इसका सेवन करें और त्वचा में निखार प्राप्त करें।

  2. कायेन पेपर :

    यह धमनियों के लिए काफी जादुई उपचार साबित हो सकता है। यह विटामिन सी और बायोफ्लैवोनॉइड्स से भरपूर होते हैं, जो रक्त के संचार में वृद्धि करते हैं और धमनियों में सूजन को ठीक करते हैं।

    1 चम्मच मिर्च पाउडर को 1 कप गर्म पानी में मिश्रित करें।

    इसे अच्छे से हिलाएं

    1 महीने तक इसका सेवन दिन में 3 बार करें।

  3. जैतून का तेल :

    नसों का उपचार करने के लिए आपका रक्त संचार अच्छा होना चाहिए। अगर आप रोज़ाना तेल को अपने नसों पर लगाएंगे तो इससे धीरे धीरे दर्द और सूजन कम होगा।

    बराबर मात्रा में जैतून का तेल और विटामिन इ का तेल मिश्रित करें और इसे हल्का गर्म कर लें। इससे कुछ मिनटों तक अपने नसों पर मालिश करें। यह पद्दति 2 महीने तक हर दिन 2 बार दोहराएं।

    आप इसमें साइप्रेस के तेल की 4 बूँदें और 2 चम्मच गर्म जैतून का तेल मिश्रित कर सकते हैं। इसे अच्छे से मिलाएं और अपने शरीर को आराम दें।

  4. लहसुन :

    लहसुन सूजन रोकने की सबसे बेहतरीन दवाइयों में से एक के रूप में जाना जाता है। यह वेरिकोज नसों की समस्या को भी हल करता है। .इसके अलावा यह रक्त की धमनियों में मौजूद विषैले पदार्थ निकालता है और रक्त के संचार में वृद्धि करता है।

    लहसुन के 6 फाहे काटें और इन्हें एक साफ़ कांच के पात्र में डाल दें।

    अब 3 ताज़े टुकड़ों से संतरे का अंश लें और इसे भी इस पात्र में डालें।

    इसमें 2 चम्मच जैतून का तेल मिश्रित करें।

    अब इस मिश्रण को 12 घंटों के लिए छोड़ दें।

    अब इस पात्र को हिलाएं और इस मिश्रण की कुछ बूँदें अपनी उँगलियों पर डालें।

    अपनी प्रभावित नसों पर इस मिश्रण से गोलाकार मुद्रा में करीब 15 मिनट तक मालिश करें।

    अब इस प्रभावित भाग को रुई से ढक लें और रातभर के लिए छोड़ दें।

    जब तक आप ठीक नहीं हो जाते, तब तक इस विधि का प्रयोग रोज़ाना करें।

    अपने भोजन में ताज़े लहसुन को सारे जीवन के लिए शामिल करें।

  5. अजवायन :

    यह उत्पाद विटामिन सी से भरपूर होता है और कोलेजन का उत्पादन भी सुनिश्चित करता है। यह कोशिकाओं की मरम्मत और उनके पुनर्विकास में भी आपकी मदद करता है। यह केपिलरीज़ को मज़बूत बनाता है औए वेरीकोज नसों के लक्षणों को दूर करता है।

    मुट्ठीभर कटी अजवाइन को 1 कप पानी में उबालें।

    इसे आंच पर 5 मिनट रहने दें।

    अब आंच से हटाकर इसे ढक दें।

    जब यह हल्का सा गर्म रह जाए तो इसे छान लें।

    इसमें 1 बूँद गुलाब और गेंदे के तेल की बूँदें मिश्रित करें।

    इसे फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें।

    इसे निकालकर इसमें रुई का कपड़ा डुबोएं।

    इसे प्रभावित भाग पर लगाएं और तब तक दोहराएं जब तक आपकी समस्या का समाधान ना हो जाए।

    कच्चा अजवाइन खाने से भी आपको काफी लाभ होगा।

    हल्दी :- नियमित तौर पर हल्दी का दूध पिये रात्रि में भोजन के बाद

    इस रोग के निवारण हेतु व्यायाम

    रात को सोते वक्त दोनो पैर को ऊँचा रख कर सोये

    खड़े होकर रहने की कोशिश कम करें

    जब भी बैठे पैर को ऊँचा रखे

    नीचे से ऊपर की ओर दोनो हाथ से नसो के खून को ऊपर की ओर लाकर छोड़े

    सुबह शाम तलवों में सरसों तेल लगाकर गुनगुने पानी मे 10 से 15 मिंट डुबो कर रखे

    सरसो तेल की मालिश नीचे से ऊपर की ओर करें

    होमेओपेथी इलाज हेतु

    Hemamallis 30 ch की 2 बूंद सुबह शाम

    Veratrum album 30 ch की 2 बूंद सुबह शाम

    होमेओपेथी ही नही आयुर्वेद एलोपैथी पंचगव्य घरेलू व अन्य चिकित्सा पध्दति के दवा के सेवन में इस बात का खास ख्याल रखे कि जो भी खाए या पिये 40 मिंट बाद या पहले

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