Wednesday, April 17, 2024
spot_img

नेपाल के लोगों का मातृत्व डीएनए भारत और तिब्बत के साथ सम्बंधितः सीसीएमबी व बीएचयू का संयुक्त शोध

69 / 100

नेपाल के लोगों का मातृत्व डीएनए भारत और तिब्बत के साथ सम्बंधितः सीसीएमबी व बीएचयू का संयुक्त शोध

वाराणसी : हिमालय क्षेत्र का मुख्य भाग होने के कारण, नेपाल दक्षिण और पूर्व एशिया के लोगो के डीएनए के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकता है। नेपाल की हिमालय पर्वत श्रृंखला ने मनुष्य के माइग्रेशन के लिए एक बैरियर का काम किया है, जबकि साथ ही, इसकी घाटियों ने निरंतर व्यापारिक से रूप लोगो को जोड़ने का काम किया है। इन ऐतिहासिक हिमालयी व्यापार मार्गों के आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व के बावजूद, इस क्षेत्र के लोगों के डीएनए और माइग्रेशन के बारे में बहुत कम जानकारी है। (सीएसआईआर-सेलुलर और आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीसीएमबी), हैदराबाद, और काशी हिन्दू विश्विद्यालय (बी.एच्.यू.) भारत के शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने नेपाल की आबादी के मातृ वंश का अध्ययन किया है जिसके परिणाम 15 अक्टूबर 2022 को ह्यूमन जेनेटिक्स पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं।

डीबीटी-सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स (सीडीएफडी), हैदराबाद के निदेशक डॉ के थंगराज ने बताया कि “नेपाली लोगो पर यह पहला सबसे बड़ा अध्ययन है, जहां हमने नेवार, मगर, शेरपा, ब्राह्मण, थारू, तमांग और काठमांडू और पूर्वी नेपाल की आबादी सहित नेपाल के विभिन्न जातीय समूहों के 999 व्यक्तियों के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए सीक्वेंस का विश्लेषण किया है। और पाया कि अधिकांश नेपाली आबादी ने हिमालय के उचाई पर रहने वाले लोगो की तुलना में तराई की आबादी से अपने मातृ वंश को प्राप्त किया है”।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा की, “भारत और तिब्बत के साथ नेपाल के सांस्कृतिक संबंध उनके अनुवांशिक इतिहास में भी परिलक्षित होते हैं।”

इस अध्ययन से प्राप्त परिणामों ने शोधकर्ताओं को इतिहास और अतीत की डेमोग्राफ़िक घटनाओं के बारे में कई घटनाक्रमों को पता करने में मदद की जिसने वर्तमान नेपाली आनुवंशिक विविधता को बनाया। अध्ययन के प्रथम लेखक त्रिभुवन विश्वविद्यालय, राजदीप बसनेट ने बताया कि “हमारे अध्ययन से पता चला है कि नेपालियों के प्राचीन अनुवांशिक डीएनए को धीरे-धीरे विभिन्न मिश्रण एपिसोड द्वारा बदल दिया गया था; साथ ही दक्षिणपूर्व तिब्बत के रास्ते 3.8-6 हजार साल पहले लोगो के हिमालय पार करने के प्रमाण मिले है”।

डीएसटी – बीरबल साहनी इंस्टिट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज़, लखनऊ के डॉ. नीरज राय ने कहा कि “नेवार और मगर जैसे तिबेतो-बर्मन समुदायों की ऊंचाई पर रहने वाले तिब्बतियों/शेरपाओं से डीएनए के आधार पर काफी विभिन्नता दिखती है । इतिहास, पुरातात्विक और आनुवंशिक जानकारी का उपयोग करते हुए इस अध्ययन ने हमें नेपाल के तिबेतो-बर्मन समुदायों के जनसंख्या इतिहास को समझने में मदद की है।’

सीएसआईआर-सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के निदेशक डॉ विनय के नंदीकुरी ने कहा, “इस तरह का अध्ययन प्रारंभिक मानव माइग्रेशन और विभिन्न आबादी की आनुवंशिक समानताएं स्थापित की बेहतर समझ के लिए सहायक है।”

अध्ययन का ऑनलाइन लिंकः

Link: https://link.springer.com/article/10.1007/s00439-022-02488-z

सम्पर्क सूत्र – K. Thangaraj (9908213822)

ALSO READ

आयुर्वेद कैसे काम करता है – क्या है तीन दोष ?

सम्पूर्ण भोजन के साथ अपने बच्चे का पूर्ण विकास सुनिश्चित करें : आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे 

वजन कम करने में कारगर हे ये आयुर्वेदिक औषधियाँ :आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे

सोने से पहले पैरों की मालिश करेंगे तो होंगें ये लाभ: आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे

कुलपति अवध विश्वविद्यालय के कथित आदेश के खिलाफ मुखर हुआ एडेड डिग्री कालेज स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ

अयोध्या में श्री राम मंदिर तक जाने वाली सड़क चौड़ीकरण के लिए मकानों और दुकानों का ध्वस्तीकरण शुरू

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम जन्मभूमि परिसर के विकास की योजनाओं में किया बड़ा बदलाव

पत्रकार को धमकी देना पुलिस पुत्र को पड़ा महंगा

बीएचयू : शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए संस्थानों को आकांक्षी होने के साथ साथ स्वयं को करना होगा तैयार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा को 21वीं सदी के आधुनिक विचारों से जोड़ना : PM मोदी

प्रवेश सम्बधित समस्त जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

घर की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए मिल रही सब्सिडी, बिजली बिल का झंझट खत्म

बीएचयू : कालाजार को खत्म करने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण खोज

JOIN
JOIN

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

For You
- FOLLOW OUR GOOGLE NEWS FEDS -spot_img
डा राम मनोहर लोहिया अवध विश्व विश्वविद्यालय अयोध्या , परीक्षा समय सारणी
spot_img

क्या राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द होने से कांग्रेस को फायदा हो सकता है?

View Results

Loading ... Loading ...
Latest news
प्रभु श्रीरामलला सरकार के शुभ श्रृंगार के अलौकिक दर्शन का लाभ उठाएं राम कथा सुखदाई साधों, राम कथा सुखदाई……. दीपोत्सव 2022 श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने फोटो के साथ बताई राम मंदिर निर्माण की स्थिति