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Saturday, December 3, 2022

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा को 21वीं सदी के आधुनिक विचारों से जोड़ना : PM मोदी

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प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन पर अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन किया

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा को 21वीं सदी के आधुनिक विचारों से जोड़ना : PM मोदी

पीएम मोदी ने गुरुवार को वाराणसी में शिक्षा मंत्रालय-भारत सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन किया। इस मौका पर पीएम मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा, ”राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल आधार, शिक्षा को संकुचित सोच के दायरों से बाहर निकालना और उसे 21वीं सदी के आधुनिक विचारों से जोड़ना है।”

बताना चाहेंगे कि काशी में पीएम मोदी का आगमन हर बार काशी को एक नया फ्लेवर और एक नया कलेवर देता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। दरअसल, पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम से पहले वाराणसी के अर्दली बाजार में स्थित एलटी कॉलेज में अक्षय पात्र मध्याह्न भोजन रसोई का निरीक्षण कर अक्षय पात्र के मेगा किचन को समाज के लिए लोकार्पित किया जिसके संबंध में उन्होंने शिक्षा समागम में दिए अपने संबोधन में जिक्र किया।

पीएम मोदी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान उन्हें काशी के स्कूल के 10-12 साल की उम्र के बच्चों के साथ गप्पे-गोष्ठी करने का अवसर मिला। उन बच्चों में जो प्रतिभा, टैलेंट और कॉन्फिडेंस देखने को मिला पीएम मोदी उनसे काफी प्रभावित हुए। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि मैं उन बच्चों के शिक्षकों से जरूर मिलना चाहूंगा। पीएम ने कहा कि वे बच्चे सरकारी स्कूल के बच्चे थे और काफी प्रतिभावानी बच्चे थे।

गौरतलब हो, तीन एकड़ में 13.91 करोड़ की धनराशि से तैयार इस अक्षय पात्र किचन की क्षमता एक लाख बच्चों तक खाना पहुंचाने की है, लेकिन शुरुआत में 27,000 बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। अगस्त माह में इसकी क्षमता बढ़ाकर 1 लाख 25 हजार और अगले 6 महीने में 2 लाख बच्चों का मिड डे मिल बन सकेगा।

तीन एकड़ में 13.91 करोड़ की धनराशि से तैयार इस अक्षय पात्र किचन की क्षमता एक लाख बच्चों तक खाना पहुंचाने की है। लेकिन शुरुआत में 27,000 बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। अगस्त माह में इसकी क्षमता बढ़ाकर 1 लाख 25 हजार और अगले 6 महीने में 2 लाख बच्चों का मिड डे मिल बन सकेगा।

देश के अमृत संकल्पों को पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी हमारी शिक्षा व्यवस्था और युवा पीढ़ी पर

शिक्षा समागम कार्यक्रम की शुरुआत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना से की गई थी जिसके पश्चात् पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, अखिल भारतीय शिक्षा समागम उस पवित्र धरती पर हो रहा है जहां आजादी से पहले देश की इतनी महत्वपूर्ण यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी। यह समागम आज एक ऐसे समय हो रहा है जब देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। अमृत काल में देश के अमृत संकल्पों को पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी हमारी शिक्षा व्यवस्था पर है, हमारी युवा पीढ़ी पर है।

आजादी के बाद शिक्षा नीति में थोड़ा बहुत बदलाव हुआ

पीएम मोदी ने कहा हमारे देश में मेधा की कभी कमी नहीं रही। लेकिन दुर्भाग्य से हमें ऐसी व्यवस्था बनाकर दी गई थी, जिसमें पढ़ाई का मतलब नौकरी ही माना गया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद शिक्षा नीति में थोड़ा बहुत बदलाव हुआ, लेकिन बहुत बड़ा बदलाव रह गया था। अंग्रेजों की बनाई व्यवस्था कभी भी भारत के मूल स्वभाव का हिस्सा नहीं थी और न हो सकती। प्रधानमंत्री ने कहा कि नए भारत के निर्माण के लिए नई व्यवस्थाओं का निर्माण, आधुनिक व्यवस्थाओं का समावेश उतना ही जरूरी है। जो पहले कभी भी नहीं हुआ, जिनकी देश पहले कभी कल्पना भी नहीं करता था, वो आज के भारत में हकीकत बन रहे हैं।

हम केवल डिग्री धारक युवा तैयार न करें

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम केवल डिग्री धारक युवा तैयार न करें, बल्कि देश को आगे बढ़ने के लिए जितने भी मानव संसाधनों की जरूरत हो, हमारी शिक्षा व्यवस्था वो देश को दे। इस संकल्प का नेतृत्व हमारे शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों को करना है।

काशी से निकलने वाला अमृत अवश्य देश को देगा नई दिशा

पीएम मोदी आगे कहते है कि हमारे यहां उपनिषदों में भी कहा गया है विद्ययामृतमश्नुते, अर्थात् विद्या ही अमृत्व और अमृत तक ले जाती है। काशी को भी मोक्ष की नगरी इसलिए कहते हैं क्योंकि हमारे यहां मुक्ति का एकमात्र मार्ग ज्ञान को विद्या को ही माना गया है और इसलिए शिक्षा और शोध का, विद्या और बोध का इतना बड़ा मंथन जब सर्वविद्या के प्रमुख केंद्र काशी में होगा तो इससे निकलने वाला अमृत अवश्य देश को नई दिशा देगा।

शिक्षा को संकुचित सोच के दायरों से बाहर निकालना NEP का आधार

पीएम मोदी ने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल आधार, शिक्षा को संकुचित सोच के दायरों से बाहर निकालना और उसे 21वीं सदी के आधुनिक विचारों से जोड़ना है। हम केवल डिग्री धारक युवा तैयार न करें, बल्कि देश को आगे बढ़ने के लिए जितने भी मानव संसाधनों की जरूरत हो, हमारी शिक्षा व्यवस्था वो देश को दें। इस संकल्प का नेतृत्व हमारे शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों को करना है।

उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना की इतनी बड़ी महामारी से हम न केवल इतनी तेजी से उबरे, बल्कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक हैं। आज हम दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम हैं। स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में जहां पहले केवल सरकार ही सब करती थी वहां अब प्राइवेट प्लेयर्स के जरिए युवाओं के लिए नई दुनिया बन रही है।

नई शिक्षा नीति में पूरा फोकस बच्चों की प्रतिभा और चॉइस के हिसाब से स्किल्ड बनाने पर

देश की बेटियों के लिए, महिलाओं के लिए भी जो क्षेत्र पहले बंद हुआ करते थे, आज वो सेक्टर बेटियों की प्रतिभा के उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। नई नीति में पूरा फोकस बच्चों की प्रतिभा और चॉइस के हिसाब से उन्हें स्किल्ड बनाने पर है। हमारे युवा स्किल्ड हों, कॉन्फिडेंट हों, प्रेक्टिकल और केल्कुलेटिव हो, शिक्षा नीति इसके लिए जमीन तैयार कर रही है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति अब मातृभाषा में खोल रही पढ़ाई के रास्ते

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए देश के एजुकेशन सेक्टर में एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर ओवरहॉल पर भी काम हुआ है। आज देश में बड़ी संख्या में नए कॉलेज खुल रहे हैं, नए विश्वविद्यालय खुल रहे हैं, नए IIT और IIM की स्थापना हो रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति अब मातृभाषा में पढ़ाई के रास्ते खोल रही है। इसी क्रम में, संस्कृत जैसी प्राचीन भारतीय भाषाओँ को भी आगे बढ़ाया जा रहा है

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प्रवेश सम्बधित समस्त जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

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