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भाषा संरक्षण सभ्यता सहेजने की प्रथम सीढ़ीः डाॅ0 मनोज मिश्र

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भाषा संरक्षण सभ्यता सहेजने की प्रथम सीढ़ीः डाॅ0 मनोज मिश्र

जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में समाचारों में वैज्ञानिक प्रयोग विषय पर आयोजित हुई संगोष्ठी

अयोध्या। डाॅ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में समाचारों में वैज्ञानिक प्रयोग विषय पर शुक्रवार को व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ0 मनोज मिश्र ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषाओं के विकास पर अधिक फोकस किया गया है। भारत में बहुत सी मात्र भाषाएं संरक्षण के अभाव में विलुप्त हो गई।

भाषा संरक्षण सभ्यता सहेजने की प्रथम सीढ़ी है

उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता आज पुष्पित पल्लवित हो रही है तो उसका कारण हमारे पूर्वजों की दूरदृष्टि रही है। अन्यथा दुनिया की कई सभ्यताएं नष्ट हो गई और भारत आज भी दुनिया के समक्ष अपना प्राचीन वैभव समेटे हुए है। डाॅ0 मनोज ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन भारत में जितनी प्रगति कर ली थी आज भी दुनिया में उसकी चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि जीरो की खोज से लेकर प्लास्टिक सर्जरी, चिकित्सा और आर्यभट्ट जैसे वैज्ञानिकों ने भारत में जन्म लिया।

पत्रकारिता के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रयोग आधुनिक पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करने वाली हैं। पत्रकारिता में गलत तथ्यों को परखने के लिए जागरूक होना आवश्यक है। गलत तथ्य मीडिया के लिए संकट खड़ा करते हैं। सभी को अपनी पहुंच मातृभाषा पर बढ़ानी होगी, हंस की तरह नीरक्षीर का भेद करना सीखना होगा। उन्होंने बताया कि भारत में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाने के लिए 4 मार्च 1958 प्रथम विज्ञान नीति लागू की गई जन-जन में विज्ञान के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सत्य को परखा जाता है। डाॅ0 मिश्रा ने कहा कि विज्ञान को जीवन में शामिल करना आवश्यक है। प्रत्येक को जीवन में जिज्ञासु एवं जागरूक होना चाहिए। वैज्ञानिक परीक्षण से भ्रमित होने से बच सकते हैं। विज्ञान सत्यता के परीक्षण की विधा है।

कार्यक्रम में विभाग के समन्वयक डॉ0 विजयेन्दु चतुर्वेदी ने कहा कि पत्रकारिता में विज्ञान पथ प्रदर्शक के रूप में मार्ग प्रशस्त करता है। समाचारों के भ्रामक खबरों का परीक्षण आवश्यक हो जाता है। कोरोना संक्रमण में यह देखा गया कि चिकित्सा मानकों से परे होकर कुछ भ्रामक चिकित्सकीय उपायों ने कईनागरिकों के जीवन पर संकट खड़ा कर दिया। इसलिए पत्रकारों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि समाज को वैज्ञानिक तथ्यों आधार पर ही जागरूक किया जाए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि का स्वागत विभाग के शिक्षक डाॅ0 राज नारायण पाण्डेय व डाॅ0 अनिल कुमार विश्वा द्वारा अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित। इस अवसर पर बलराम, शशांक, सुरभि, ज्योति, युक्ति, वर्षा, गीताजंलि, आशु, अंतिमा, प्रतिष्ठा, शिवानी, अंशुमान, रितेश, रोहित, शशि, शशिकेश, अमन, अश्वनी, पुनीत, अपराजिता सहित बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

https://www.ayodhyalive.com/भाषा-संरक्षण-सभ्यता-सहेज/

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