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Sunday, October 2, 2022

संगम क्षेत्र के आसपास ना हो मांस मदिरा की सार्वजनिक बिक्री

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संगम क्षेत्र के आसपास ना हो मांस मदिरा की सार्वजनिक बिक्री
साधु संत धर्म पीठ प्रमुख वह विद्वत जन की मांग

प्रयागराज । प्रयागराज के संगम क्षेत्र से पांच कोष की परिधि में मांस और मदिरा की बिक्री पर सार्वजनिक प्रतिबंध लगे। यह मांग प्रयागराज विद्वत परिषद की बैठक में आज की गई।साधु संतों, धार्मिक स्थानों और प्रयागराज के विद्वत जनों की बैठक में गंगा नदी में नाव पर मांस और मदिरा का उपयोग करने पर सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किया गया ।

प्रयागराज विद्वत परिषद की बैठक में प्रयागराज के मंदिरों मठों और धर्म स्थानों के प्रमुखों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे स्वामी हरि चेतन ब्रह्मचारी ने कहा कि प्रयागराज तीर्थों का राजा है ऐसे में यहां पर हर हालत में जल्द से जल्द संगम के मध्य से पांच कोष तक मांस मदिरा का सार्वजनिक उपयोग और बिक्री बंद होनी चाहिए उत्तर प्रदेश सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहां की प्रयागराज महर्षि भरद्वाज की नगरी है और यह विडंबना है कि सनातन धर्म के सबसे बड़े गुरुकुल के मूल स्थान का नाम भरद्वाज पार्क कर दिया गया है जिसकी वजह से वहां पर लड़के लड़कियां अश्लीलता करते नजर आते हैं यहां पर पुरातत्व विभाग में खुदाई की है अतः इस स्थान का नाम भरद्वाज आश्रम किया जाए।

बैठक में प्रस्ताव पारित करके मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से तीर्थों के राजा हिंदुओं की आस्था के प्रतीक संगम क्षेत्र में सार्वजनिक रूप से मांस मदिरा के प्रयोग बिक्री पर जल्द से जल्द प्रतिबंध की मांग की गई। विद्वत परिषद की बैठक में महर्षि भारद्वाज के मूल स्थान को भरद्वाज पार्क लिखे जाने पर आपत्ति प्रकट की साथ ही वहां हो रही अश्लीलता पर भी रोक लगाने की मांग की गई। महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत एलोपी देवी मंदिर के प्रबंधक यमुना पुरी जी ने इन प्रस्तावों का समर्थन करते हुए कहा कि हर जगह का पाप संगम में स्नान के पश्चात मिट जाता है किंतु इस धार्मिक नगरी में जो पार्क किया जाएग

वह मिट नहीं सकता अतः हर हाल में इस धर्म क्षेत्र में मांसाहार और मदिरा पर प्रतिबंध लगना चाहिए । बैठक में लक्ष्मी नारायण मंदिर के घनश्यामाचार्य ने कहा कि राम वन गमन मार्ग की पहचान करके यहां पर कार्यक्रम आयोजित होना चाहिए। वैकुंठ आश्रम के श्रीधराचार्य ने प्रयागराज की महिमा का वर्णन करते हुए यहां पर मांस मदिरा की बंदी और पंचकोसी परिक्रमा का निर्धारण उसका संवर्धन करने की बात रखी। इस संबंध में पत्राचार करने तथा मुख्यमंत्री से मिलकर प्रयागराज के विद्वत जनो
की बात अवगत कराने का निर्णय भी लिया गया ।बैठक में वक्ताओं ने महर्षि भरद्वाज चौराहा कि मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुरूप उसका नामकरण किए जाने की मांग भी की गई।

विद्वत परिषद की बैठक में राम राम वन गमन मार्ग के चिन्हीकरण के साथ भगवान राम के प्रयाग आगमन पर कार्यक्रम और राम वन गमन मार्ग पर यात्रा निकालने का निर्णय भी किया गया। बैठक में प्रयागराज विद्वत परिषद की आवश्यकता पर बल देते हुए हर माह बैठक का निर्णय लिया गया। संचालन विद्वत परिषद के संयोजक वीरेंद्र पाठक ने किया। कुछ महात्मा और अन्य विद्वत जन ऑनलाइन जुड़े और इन मुद्दों पर अपना समर्थन किया। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती शंकराचार्य आश्रम नरसिंह मंदिर सहित कई महात्माओं ने अपना समर्थन किया।

अलोपी देवी मंदिर मैं विद्वत परिषद की बैठक में वैष्णव धाम के श्रीधराचार्य लक्ष्मी नारायण मंदिर के घनश्यामाचार्य तक्षक तीर्थ के रविशंकर जी महंत यमुना पुरी जी नाग वासुकी मंदिर के श्याम धर त्रिपाठी जी निंबार्क आश्रम के स्वामी राधा राघव दास जी कैवल्यधाम के हर्ष चैतन्य जी ज्योतिषाचार्य बृजेंद्र मिश्रा जी रामनरेश पिंडी वासा शंभू नाथ त्रिपाठी अंशुल महामंत्री रामायण मेला डॉ प्रमोद शुक्ला मीडिया थ के प्रदीप पांडे ज्योतिषाचार्य अमित कुमार राय डा कमलेश दत्त त्रिपाठी डॉ चंद्र विजय चतुर्वेदी निंबार्क आश्रम के व्यवस्थापक लक्ष्मीकांतम दुबे प्रमुख रूप से थे।

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