अयोध्यालाइव

Saturday, December 3, 2022

भारतीय गाय, कृषि एवं समग्र स्वास्थ्य विषयक अखिल भारतीय संगोष्ठी

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
भारतीय गाय, कृषि एवं समग्र स्वास्थ्य विषयक अखिल भारतीय संगोष्ठी

Listen

भारतीय गाय, कृषि एवं समग्र स्वास्थ्य विषयक अखिल भारतीय संगोष्ठी

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वैदिक विज्ञान केन्द्र के सभागार में 5-7 अगस्त 2022 तक भारतीय गाय, कृषि एवं समग्र स्वास्थ्य विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar on Indigenous Cow Agriculture and Holistic Health) का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन अध्यक्ष एवं आयुर्वेद संकाय, काय चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. के.एन. मूर्ती ,आयोजन सचिव प्रो. ओ.पी. सिंह एवं प्रो. सुनंदा पेढेकर ने बताया कि इस संगोष्ठी के दौरान उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली,महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, केरल,आसाम, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश आदि प्रदेशों से लगभग 300 प्रतिभागी हिस्सा लेकर शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।

इसके अलावा मारीशश, श्रीलंका एवं नैपाल के भी विशेषज्ञ शामिल होंगे जिनमें गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र देवलापार नागपुर के समन्वयक श्रीमान सुनील मानसिंहका जी, वैद्य नंदिनी भोजराज जी, डॉ. संजय वाते, गोविंद वल्लभ पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर से डॉ. आर एस चौहान, श्रीमान राज मदनकर आदि शामिल होंगे ।

महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर उत्तर प्रदेश के कुलपति प्रोफेसर ए.के. सिंह, परीक्षा नियंता प्रोफेसर सी.के. राजपूत, प्रयागराज से राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के राष्ट्रीय गुरु प्रोफेसर जी. एस. तोमर, मुंबई से पंचकर्म विशेषज्ञ प्रोफेसर यू.एस. निगम, भोपाल से पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रोफेसर उमेश शुक्ला, राजकीय आयुर्वैदिक मेडिकल कॉलेज पपरौला के प्रधानाचार्य एवं डीन प्रोफेसर विजय चौधरी, दिल्ली से प्रोफ़ेसर दिलीप वर्मा, पश्चिम बंगाल से प्रोफेसर सुकुमार घोष, कृषि विशेषज्ञ सिवनी मध्य प्रदेश से डॉक्टर एन.के. सिंह, आई.आई. वी. आर. सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी से डॉक्टर ए.बी. सिंह, ICAR रिसर्च कॉम्प्लेक्स फॉर ईस्टर्न रिसर्च, रांची से डॉक्टर ए.के. सिंह के अलावा लगभग 200 एमडी एवं पीएचडी छात्र अपना शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे ।

उन्होने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य देशी गाय, गोपालन एवं पंचगव्य चिकित्सा द्वारा जनमानस को होने वाली जीवन शैलीजन्य व्याधियों का उपचार जैसे कैंसर, मधुमेह, अवसाद, रक्तचाप, एलर्जी आदि का उपचार के साथ-साथ जैविक खेती (आर्गेनिक फार्मिंग) पर चर्चा की जायेगी। दूध उत्पादन के मामले में भारत दुनिया में शीर्ष स्थान पर

है.आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में वैश्विक स्तर पर सालाना 880 मिलियन टन से अधिक दूध का उत्पादन हुआ था, जिसमें से 184 मिलियन टन से अधिक दूध का भारत में हुआ था, जो कुल दूध उत्पादन का सबसे अधिक 22 फीसदी था। दूध उत्पादन के मामले को भारत को विश्व में शीर्ष पर पहुंचाने वाले राज्यों की भूमिका की बात की जाए तो इसमें उत्तर प्रदेश और राजस्थान का नाम सबसे अव्वल है. वर्ष 2000 से 2020 तक देश में कुल दूध उत्पादन में उत्तर प्रदेश का स्थान पहला रहा है, जबकि इन 20 सालों में दूसरे स्थान पर राजस्थान काबिज रहा है. नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में उत्तर प्रदेश 31834 टन सालाना दूध उत्पादन के साथ देश में शीर्ष पर था. जबकि 25573 टन उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर राजस्थान काबिज था. इसमे

75% A1 मिल्क का उत्पादन होता हैI

पश्चिमी नस्ल की गायों जैसे जर्सी,होल्स्टीन और फ्राइजियन गायों से प्राप्त दूध को A1 दूध कहा जाता है। इस दूध में A1 कैसिइन प्रोटीन पाया जाता है जिस कारण इसका नाम A1 दूध पड़ा है। केसीन प्रोटीन अल्फा और बीटा जैसे प्रोटीन होते हैं। इसमें जो बीटा प्रोटीन होते हैं, उनका नाम A1 और A2 और जिसमें A1 बीटा प्रोटीन पाया जाता है, उसे A1 क्वालिटी का दूध कहा जाता है। इसमें मौजूद BCM-7 या Beta Casomorphin-7 की उपस्थिति केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (nervous system) पर मॉर्फिन जैसे प्रभाव को पैदा करती है। एक बार जो भी इसका सेवन करता है इसे अपनी आदत में उतार सकता है और ये तंत्रिका विकार (neuro disorders) के लिए भी जिम्मेदार हो सकता है।

साथ ही ये हमारी सीखने की क्षमता पर भी असर कर सकता है। हाई लैक्टोज इंटोलरेंस के साथ, A1 दूध के प्रकार में कार्बोहाइड्रेट और फैट की मात्रा पाई जाती है जो मनुष्यों की आंत में नुकसानदेह बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा दे सकते है और इसे पीने से बच्चों की व्याधिप्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है।इतना ही नहीं, A1 दूध आपके हार्मोनल सिस्टम पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके सेवन से टाइप 1 मधुमेह और दिल की बीमारी का जोखिम भी बढ़ सकता है। A1 दूध में हिस्टाडीन नामक अमीनो एसिड होता है, जो की शरीर मे हिस्टामिन का स्राव करवाता है जो बच्चों में त्वचा एलर्जी, बहती नाक, अस्थमा और खांसी का कारण बन सकता है।

यहां तक कि ये मिल्क बच्चों में मधुमेह और मोटापे जैसे दीर्घकालिक जोखिम को भी पैदा कर सकता है। भारतीय नस्ल की गायों जैसे गंगातीरी, साहीवाल, गिर, लाल सिंधी आदि से प्राप्त किया गया दूध A2 मिल्क की श्रेणी में आता है। इस मिल्क में A2 कैसिइन प्रोटीन पाया जाता है जिस वजह से इसका नाम A2 मिल्क रखा गया है। A2 टाइप के दूध के सेवन से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं, क्योंकि यह बेहतर प्रतिरक्षा यानी इम्यूनिटी को बूस्ट करता है।

A2 दूध में प्रोलाइन की उपस्थिति बीटा कैसोमोर्फिन -7 को हमारे शरीर तक पहुंचने से रोकने में मदद करती है, साथ ही ऑटिज्म और न्यूरो विकारों जैसी पुरानी बीमारियों से भी बचाव करती है। A2 दूध के प्रकार में ओमेगा -3 फैटी एसिड होता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त इसमें मौजूद टेशियम से ब्लड शुगर लेवल को भी कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

इस प्रकार के दूध में विटामिन ए होता है जिससे ये आपकी आंखों की सेहत के लिए लाभकारी है। आपको आपकी आंखों की रोशनी बढ़ाता है और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं को रोकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि A2 किस्म का दूध, A1 की तुलना में ज्यादा लाभकारी होता है। A2 दूध देसी नस्‍ल की गाय से प्राप्त किया जाता है जो कि ताजी और हरी घास खाती हैं। इसमें A1 की अपेक्षा प्रोटीन और पोषक तत्व अधिक होते हैं। इस तरह का दूध डायबिटिज, हृदय रोग एवं न्‍यूरोलॉजीकल डिसऑर्डर जैसी समस्याओं से मानवों का बचान करता है और इम्यूनिटी को बढ़ाता है।

राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन आयुर्वेद संकाय के काय चिकित्सा विभाग एवं गो विज्ञान अनुसंधान केन्द्र देवलापुर, नागपुर (महाराष्ट्र) के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। आयोजन सचिव डॉ. ओ.पी. सिंह ने बताया कि पंचगव्य में पॉच चीजे जैसे गोदुग्ध, दही, घृत, गौमूत्र और गोमय (गोबर )शामिल है। इसमे दूध, दही, घी, गोबर एवं गौमूत्र का प्रयोग अलग-अलग एवं संयुक्त रुप से खून को पतला करना, रक्त शोधन, भूलने वाली बीमारी, पार्किन्शन, अल्जाइमर एवं डिमेन्शिया आदि के उपचार में प्रयोग किया जाता है।

गोमूत्र को एंटी माइक्रोबियल, एंटीफंगल, कर्करोग रोधक, मेदोरोग, कुष्ठ, और धमनी काठिन्य (ब्लॉकेज) में उपयोग किया जाता है। गो दुग्ध जरा व्याधि, ऑस्टियोपोरोसिस, संधिगत वात, व्याधिक्षमत्व (immunity)को बढ़ाने में कारगर है l शिशिर वर्षा और हेमंत ऋतु में गोदधि का समुचित उपयोग बढ़ी हुई वात को नियंत्रित करता है। गोमय ना ही सिर्फ कृषि की पैदावार को बढ़ाता है अपितु इसका प्रयोग कृषि में अनावश्यक कीड़े मकोड़ों की वृद्धि को भी रोकता है।

गोमय लेप कुष्ठ और त्वचा के अनेक विकारों में प्रभावी है। प्रति एक किलो गाय के गोबर से लगभग 60 लीटर गैसों का पर्यावरण में उत्सर्जन होता है, जिनमे अत्यधिक मात्रा मीथेन गैस की है। मीथेन गैस ओजोन पर्त के क्षरण में मुख्य भूमिका निभाती है

देशी गाय के ताजे गोबर पर पायी जाने वाली पतली सी झिल्लीनुमा पर्त, गोबर में मौजूद इस मीथेन गैस को पर्यावरण में फैलने से रोकती है। उपरोक्त विषयों पर विस्तृत इस संगोष्ठी में छः सत्रों के अन्तर्गत लगभग 200 शोध पत्र प्रस्तुत किये जायेगें। पत्रकारवार्ता को प्रो. के.एन. मूर्ति, प्रो. ओ.पी. सिंह तथा देवाशीष दास आदि ने सम्बोधित किया।

ALSO READ

कुलपति अवध विश्वविद्यालय के कथित आदेश के खिलाफ मुखर हुआ एडेड डिग्री कालेज स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ

अयोध्या में श्री राम मंदिर तक जाने वाली सड़क चौड़ीकरण के लिए मकानों और दुकानों का ध्वस्तीकरण शुरू

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम जन्मभूमि परिसर के विकास की योजनाओं में किया बड़ा बदलाव

पत्रकार को धमकी देना पुलिस पुत्र को पड़ा महंगा

बीएचयू : शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए संस्थानों को आकांक्षी होने के साथ साथ स्वयं को करना होगा तैयार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा को 21वीं सदी के आधुनिक विचारों से जोड़ना : PM मोदी

प्रवेश सम्बधित समस्त जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

घर की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए मिल रही सब्सिडी, बिजली बिल का झंझट खत्म

बीएचयू : कालाजार को खत्म करने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण खोज

आम की बागवानी को प्रदेश सरकार दे रही है बढ़ावा

ये है दुनिया का सबसे महंगा आम : सुरक्षा में लगे 3 गार्ड और 6 कुत्ते, कीमत जान रह जाएंगे हैरान

भारतीय आमों की विदेशी बाजार में जबरदस्त मांग

Hi Friends, This is my YouTube Channel. Please

Subscribe and Support this Youtube Channel To Grow

ADVERTISEMENT

Related News

Leave a Reply

JOIN TELEGRAM AYODHYALIVE

Currently Playing
Coming Soon
देश का सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री कौन रहा है?
देश का सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री कौन रहा है?
देश का सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री कौन रहा है?

Our Visitor

131203
Users Today : 11
Total Users : 131203
Views Today : 16
Total views : 170083
December 2022
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
Currently Playing

OUR SOCIAL MEDIA

Also Read

%d bloggers like this: