Sunday, May 26, 2024
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होलिका दहन पर अद्भुत संयोग जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व

होलिका दहन पर अद्भुत संयोग जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व

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पंडित सुधांशु तिवारी
(ज्योतिषाचार्य एस्ट्रो साइंस विशेषज्ञ)
होलिका दहन इस बार 07 मार्च को किया जाएगा. होलिका दहन छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है. होलिका दहन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में की जाए तो सबसे शुभ होता है. होलिका दहन के दिन महिलाएं घर में सुख शांति के लिए पूजा करती हैं. होलिका दहन का यह दिन बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता है.

 खुशियों और रंगों भरा त्योहार होली आने वाला है. इस साल होलिका दहन 7 मार्च को है. उसके अगले दिन 8 मार्च को रंग वाली होली खेली जाएगी. होलिका दहन को छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि होलिका दहन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में की जाए तो सबसे शुभ होता है. इस दौरान भद्रा मुख को त्याग करके रात के समय होलिका दहन करना शुभ होता है.  

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

इस बार होलिका दहन 07 मार्च को होगा और 8 मार्च को होली खेली जाएगी. पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 06 मार्च को शाम 04 बजकर 17 मिनट पर होगी और इसका समापन 07 मार्च को शाम 06 बजकर 09 मिनट पर होगी. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 07 मार्च, मंगलवार को शाम 06 बजकर 24 मिनट से रात 08 बजकर 51 मिनट तक रहेगा. भद्रा काल का समय 06 मार्च को शाम 04 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगा और 07 मार्च को सुबह 05 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगा. 

होलिका दहन की पूजन विधि
 
होलिका दहन के दिन होली का पूजा के बाद जल अर्पित करें. इसके बाद शुभ मुहूर्त के अनुसार अपने घर के किसी बड़े बुजुर्ग व्यक्ति से होलिका की अग्नि प्रज्वलित करवाएं. होलिका की अग्नि में फसल सेंके और मुमकिन हो तो इसे अगले दिन सपरिवार ग्रहण अवश्य करें. कहा जाता है होलिका दहन के दिन किया जाने वाला यह उपाय जो कोई भी व्यक्ति करता है उसके जीवन में निराशा और दुख का साया नहीं आता है. साथ ही उस व्यक्ति के परिवार के सभी लोग हमेशा रोगों से मुक्त स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीते हैं.

होलिका दहन की सामग्री

होलिका दहन की पूजा कुछ विशेष चीजों के बगैर बिल्कुल अधूरी मानी जाती है. इसलिए पूजा से पहले इन चीजों की व्यवस्था अवश्य कर लें. इसमें एक कटोरी पानी, गोबर के उपलों से बनी माला, रोली, अक्षत, अगरबत्ती, फल, फूल, मिठाई, कलावा, हल्दी का टुकड़ा, मूंग दाल, बताशा, गुलाल पाउडर, नारियल साबुत अनाज आदि होने चाहिए.

होलिका दहन का महत्व

घर में सुख शांति और समृद्धि के लिए होलिका दहन के दिन महिलाएं होली की पूजा करती हैं. होलिका दहन की पूजा काफी लंबे समय से शुरू की जाती है. होलिका दहन के लिए बहुत दिनों पहले से ही लोग लकड़ियां इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं. इन लकड़ियों को इकट्ठा करके एक गट्ठर के रूप में रखा जाता है और फिर होलिका दहन के शुभ मुहूर्त में इसे जलाया जाता है. होलिका दहन का यह दिन बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता है. 

होलिका दहन का पौराणिक महत्व

पुराणों के अनुसार, दानवराज हिरण्यकश्यप ने जब देखा की उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भगवान के अलावा किसी अन्य को नहीं मानता तो वह क्रुद्ध हो उठा.   उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए. होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि नुकसान नहीं पहुंचा सकती. किन्तु हुआ इसके ठीक विपरीत, होलिका जलकर भस्म हो गयी. भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ. इसी घटना की याद में इस दिन होलिका दहन करने का विधान है. होली का पर्व संदेश देता है कि इसी प्रकार ईश्वर अपने अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए सदा उपस्थित रहते हैं.

क्या है होलिका दहन

भारतीय नव संवत्सर यानी हिंदू नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की पहली तिथि को शुरू होता है. इसके आगमन से पहले पुराने संवत्सर को विदाई दी जाती है. पुराने संवत को समाप्त करने के लिए होलिका दहन किया जाता है. इसको कहीं-कहीं पर संवत जलाना भी कहते हैं. होलिका दहन में किसी वृक्ष की शाखा को जमीन में गाड़कर उसे चारों तरफ से लकड़ी, कंडे, उपले से घेरकर निश्चित मुहूर्त में जलाया जाता है. इसमें छेद वाले गोबर के उपले, गेहूं की नई बालियां और उबटन जलाया जाता है. लकड़ी की राख को घर में लाकर उससे तिलक करने की परंपरा भी है. 

होलिका दहन की विशेषता 

इस दिन मन की तमाम समस्याओं का निवारण हो सकता है. रोग, बीमारी और विरोधियों की समस्या से छुटकारा मिल सकता है. आर्थिक बाधाओं से राहत मिल सकती है. ईश्वर की कृपा पाना चाहते हैं तो इस दिन आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. अलग-अलग चीजों को अग्नि में डालकर अपनी बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं. 

आपके शहर में होलिका दहन का मुहूर्त

उज्जैन – 12.40 AM- 05.56 AM (6-7 मार्च की दरमियानी रात)

वाराणसी – 12.40 AM – 05.56 AM (6-7 मार्च की दरमियानी रात)

नई दिल्ली – 06.24 PM- 08.51 PM (7 मार्च 2023)

मुंबई – 06.46 PM – 08.52 PM (7 मार्च 2023)

जयपुर – 06.31 PM – 08.58 PM (7 मार्च 2023)

कोलकाता – 05.42 PM – 06.09 PM (7 मार्च 2023)

रांची – 05.54 PM – 06.09 PM (7 मार्च 2023)

भोपाल – 06.26 PM – 08.52 PM (7 मार्च 2023)

चंडीगढ़ – 06.25 PM – 08.53 PM (7 मार्च 2023)

रायपुर – 06.10 PM – 08.36 PM (7 मार्च 2023)

बेंगलुरू – 06.29 PM – 08.54 PM (7 मार्च 2023)

पटना – 05.54 PM – 06.09 PM (7 मार्च 2023)

अहमदाबाद – 06.45 PM – 09.11 PM (7 मार्च 2023)

हैदराबाद- 06.24 PM – 08.49 PM (7 मार्च 2023)

सुल्तानपुर प्रवक्ता: होली पर घर ले आएं ये 5 शुभ चीजें, चारों ओर से बरसने लगेगा पैसा

आपने देखा होगा कि होली पर कई तरह के उपाय और टोने-टोटके किए जाते हैं. यदि आप गृहस्थ या आर्थिक जीवन में किसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो इस दिन किए गए उपाय बहुत ही कारगर हो सकते हैं. इस साल 7 मार्च को होलिका दहन होगा और 8 मार्च को रंग वाली होली खेली जाएगी.

हिंदू धर्म में होली के त्योहार का विशेष महत्व बताया गया है. आपने देखा होगा कि होली पर कई तरह के उपाय और टोने-टोटके किए जाते हैं. यदि आप गृहस्थ या आर्थिक जीवन में किसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो इस दिन किए गए उपाय बहुत ही कारगर साबित हो सकते हैं. इस साल 7 मार्च को होलिका दहन होगा और 8 मार्च को रंग वाली होली खेली जाएगी. आज हम आपको पांच ऐसी अद्भुत चीजों के बारे में बताएंगे, जिन्हें होली के दिन घर लाने से आपकी धन संबंधी तमाम समस्याएं दूर हो सकती हैं.

धातु का कछुआ- वास्तु शास्त्र में कछुए को शुभता का प्रतीक माना जाता है. होली के शुभ अवसर पर आप पंच धातु से बना कछुआ घर लेकर आ सकते हैं. इस कछुए की पीठ पर श्रीयंत्र और कुबेर यंत्र होना चाहिए. जिस घर में धातु का कछुआ उत्तर दिशा में अंदर की तरफ मुख करके रखा जाता है, वहां कभी धन की कमी नहीं होती है. कछुए को किसी पानी वाले बर्तन में स्थापित करना चाहिए.

पिरामिड- वास्तु शास्त्र के अनुसार, पिरामिड में धन को आकर्षित करने की अद्भुत क्षमता होती है. जिस घर या ऑफिस में पिरामिड होता है, वहां अपार धन की प्राप्ति के मार्ग स्वत: ही खुल जाते हैं. इसका सटीक उदाहरण हमारे पुराने मंदिर हैं, जो द्रविड़ शैली में बने हुए हैं. इनका बाहरी स्वरूप पिरामिड के आकार का है और ऐसे कई मंदिर विश्व के सबसे धनी मंदिरों में शुमार हैं.

आम या अशोक के पत्ते का वंदनवार- होली पर अपने घर के मुख्य द्वार के लिए एक वंदनवार जरूर लेकर आएं. घर के मुख्य द्वार के लिए आप आम या अशोक के पत्ते का वंदनवार लेकर आ सकते हैं. इस वंदनवार को होलिका दहन के दिन सुबह के वक्त लगाएं तो बेहतर होगा. कहते हैं कि मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का वंदनवार घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकता है.

बांस का पौधा- होली के दिन अगर आप अपने ड्रॉइंग रूम या हॉल के लिए बांस का पौधा लेकर आएं तो बड़ा ही शुभ होगा. लेकिन ख्याल रखें कि इसमें सात या ग्यारह स्टिक ही हों. बांस के पौधे को बहुत ही भाग्यवर्धक माना जाता है. जिस घर में यह पौधा रहता है, वहां हमेशा माता लक्ष्मी की कृपा बरसती रहती है. दीर्घायु के लिए भी घर में बांस का पौधा रखा जाता है.

वास्तु देव की तस्वीर- यदि आपके घर में वास्तु दोष से जुड़ी समस्या आ रही है तो घर में वास्तु देवता का चित्र या तस्वीर जरूर लगाएं. इनकी तस्वीर को आप घर के किसी भी हिस्से में लगा सकते हैं. घर में वास्तु देवता की उपस्थिति से स्वत: ही सारे वास्तु दोष दूर हो जाते हैं.

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