Sunday, June 16, 2024
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भाजपा मंडल पिपरा बाजार के सभी शक्ति केंद्र के बूथ पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पुण्यतिथि पर दी गयी विनम्र श्रद्धांजलि

भाजपा मंडल पिपरा बाजार के सभी शक्ति केंद्र के बूथ पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पुण्यतिथि पर दी गयी विनम्र श्रद्धांजलि

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भारतीय जनता पार्टी पिपरा बाजार मंडल के अंतर्गत विभिन्न जगहों पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी पुष्पा अर्पित कर के श्रद्धांजलि दिया। पिपरा बाजार में मेन चौराहे पर भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष महेश रौनियार ने कहा कि डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई, 1901 को एक संभ्रांत परिवार में हुआ था। महानता के सभी गुण उन्हें विरासत में मिले थे। उनके पिता आशुतोष बाबू अपने जमाने ख्यात शिक्षाविद् थे।

डॉ. मुखर्जी ने 22 वर्ष की आयु में एमए की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा उसी वर्ष आपका विवाह भी सुधादेवी से हुआ। उनको दो पुत्र और दो पुत्रियां हुईं। वे 24 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय सीनेट के सदस्य बने। उनका ध्यान गणित की ओर विशेष था। इसके अध्ययन के लिए वे विदेश गए तथा वहां पर लंदन मैथेमेटिकल सोसायटी ने उनको सम्मानित सदस्य बनाया। वहां से लौटने के बाद डॉ. मुखर्जी ने वकालत तथा विश्वविद्यालय की सेवा में कार्यरत हो गए।
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कर्मक्षेत्र के रूप में 1939 से राजनीति में भाग लिया और आजीवन इसी में लगे रहे। उन्होंने गांधीजी व कांग्रेस की नीति का विरोध किया, जिससे हिन्दुओं को हानि उठानी पड़ी थी।
एक बार आपने कहा- ‘वह दिन दूर नहीं जब गांधीजी की अहिंसावादी नीति के अंधानुसरण के फलस्वरूप समूचा बंगाल पाकिस्तान का अधिकार क्षेत्र बन जाएगा।’ उन्होंने नेहरूजी और गांधीजी की तुष्टिकरण की नीति का सदैव खुलकर विरोध किया। यही कारण था कि उनको संकुचित सांप्रदायिक विचार का द्योतक समझा जाने लगा।

अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में एक गैर-कांग्रेसी मंत्री के रूप में उन्होंने वित्त मंत्रालय का काम संभाला। डॉ. मुखर्जी ने चितरंजन में रेल इंजन का कारखाना, विशाखापट्टनम में जहाज बनाने का कारखाना एवं बिहार में खाद का कारखाने स्थापित करवाए। उनके सहयोग से ही हैदराबाद निजाम को भारत में विलीन होना पड़ा।
1950 में भारत की दशा दयनीय थी। इससे डॉ. मुखर्जी के मन को गहरा आघात लगा।
अभी केवल जीवन के आधे ही क्षण व्यतीत हो पाए थे कि हमारी भारतीय संस्कृति के नक्षत्र अखिल भारतीय जनसंघ के संस्थापक तथा राजनीति व शिक्षा के क्षेत्र में सुविख्यात डॉ. मुखर्जी की 23 जून, 1953 को मृत्यु की घोषणा की गईं। बंगभूमि से पैदा डॉ. मुखर्जी ने अपनी प्रतिभा से समाज को चमत्कृत कर दिया था। बंगाल ने कितने ही क्रांतिकारियों को जन्म दिया है, उनमें से एक महान क्रांतिकारी डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी थे।
जिसमें प्रमुख रुप से मंडल के उपाध्यक्ष नित्यानंद पांडे अनिल कुमार राय महामंत्री योगेंदर खरवार रामाज्ञा चौहान मंडल मंत्री महेश मद्धेशिया किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष वरुण राय शक्ति केंद्र के संयोजक राजकुमार गुप्ता शैलेंद्र त्रिपाठी दिनेश गुप्ता सूर्यभान मिश्रा दिनेश गुप्ता हरीश पांडे लल्लन जयसवाल बूथ अध्यक्ष बालक पासवान मनु जयसवाल नंद जयसवाल अजय मद्धेशिया जय सिंह शंभू मद्धेशिया मंडल सहसंयोजक शैलेश मद्धेशिया कोषाध्यक्ष सत्यनारायण प्रजापति रविंदर खरवार जगरनाथ मिश्रा संदेश दुबे कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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