Saturday, February 24, 2024
spot_img

कोविड-19 के समय में सुपरस्प्रेडर बन सकते हैं भीड़भाड़ वाले स्थान या कार्यक्रम: बीएचयू

52 / 100


कोविड-19 के समय में सुपरस्प्रेडर बन सकते हैं भीड़भाड़ वाले स्थान या कार्यक्रम: बीएचयू

वाराणसी । कोविड-19 ने सामाजिक मेल-मिलाप के तरीके को तो बदला ही है, साथ ही हमारे स्वास्थ्य तथा चिकित्सा व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौतियां पेश की हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 के प्रसार और वैश्विक आबादी पर इसके दुष्प्रभाव को रोकने के लिए कई प्रोटोकॉल जारी किए हैं, जिनमें सोशल डिसटेंसिंग और मास्क पहनना प्रमुख हैं। इसके अलावा, डब्लूएच्ओ ने भीड़भाड़ वाले स्थानों व कार्यक्रमों से बचने का भी सुझाव दिया है। डब्लूएच्ओ द्वारा एक सामूहिक सभा को किसी भी ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रम के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें ऐसे लोगों की सभा शामिल है जो संक्रमण फैलाने की क्षमता रखते हैं।

अतीत में यह भी देखा गया है कि सामूहिक सभाएं मानवजनित रोगों के फैलने में मदद करती है; उदाहरणस्वरूप  2009 की महामारी इन्फ्लूएंजा (H1N1) या मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम से संबंधित कोरोनावायरस (MERS-CoV) और 2013 मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) का प्रकोप। हालांकि, बीमारी के संचरण और प्रसार में इस तरह की सामूहिक सभाओं की सटीक भूमिका का पूरी तरह से आकलन वैज्ञानिक रूप से नहीं हो पाया था। भारत में अल्फा वेरिएंट (बी.1.1.7) के भौगोलिक और सामयिक विस्तार का अध्ययन करते हुए दुनिया भर के सात संस्थानों के पंद्रह वैज्ञानिकों की एक टीम ने पंजाब में अल्फा वेरिएंट जनित कोविड-19 मामलों की असामान्य वृद्धि पाई, जो भारत के अन्य राज्यों में अल्फा वैरिएंट के प्रसार से बिलकुल अलग थी।

दिसंबर 2020 में, SARS-CoV-2 का अल्फा वैरिएंट दक्षिण-पूर्वी यूनाइटेड किंगडम (UK), में सबसे पहले मिला था, जिसे डब्लूएच्ओ ने वैरिएंट ऑफ़ कंसर्न घोषित किया। यूके से निकलकर धीरे-धीरे, यह भारत के कई राज्यों में फैल गया। विशेषकर उत्तर भारत में इसके कारण काफी संख्या में कोरोना मामले सामने आए। इसको समझने के लिए, टीम ने भारत से 3085 अल्फा वेरिएंट के जीनोमिक सीक्वेंस का विश्लेषण किया।

इस अध्ययन की पहली लेखिका जाह्नवी पारासर ने कहा की  ‘उत्तरी भारत में अल्फा वैरिएंट प्रमुख रूप से उपस्थित था और इस वैरिएंट की कई फाउन्डिंग शाखाये देखी गईं।’

भारत में अल्फा वैरिएंट का प्रसार प्रमुख रूप से दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब के राज्यों में था जहाँ इसकी 44 जेनेटिक शाखाये मौजूद थी। उल्लेखनीय है कि तीन शाखाओं को छोड़कर भारत में अल्फा वेरियंट की सभी 44 शाखाएं दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ में मौजूद थीं।

इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित जंतु विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा ‘पंजाब में कोरोना का अचानक आया उछाल प्राकृतिक नहीं था। तकनीकी रूप से, इसका फैलाव बहुत ही तेज़ था और नाम मात्र के फाउंडर्स क्लस्टर से जुड़ा था। पंजाब से प्राप्त जीनोमिक सीक्वेंस स्वतंत्र वंशावली के बजाय कुछ ही क्लस्टर्स से जुड़े थे। इस तरह के फाउंडर क्लस्टर आमतौर पर सुपर-स्प्रेडर इवेंट्स, जैसे, इनडोर मीटिंग्स या किसी बड़ी सभा के कारण देखने को मिलते है। ऐसा प्रतीत होता है कि संभवतः अधिक भीड़भाड़ वाले स्थानों या कार्यक्रमों से संक्रमण सामान्य से 5-10 गुना तेजी से बढ़ा’।

कलकत्ता विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉ. राकेश तमांग ने कहा की, ‘इस अध्ययन में, हम इस सवाल पर प्रत्यक्ष प्रमाण प्रदान करते हैं कि बड़ी सामाजिक सभाओं ने कैसे कोविड-19 को फैलने में मदद की।’

अमृता विश्वविद्यापीठम केरल में एसोसिएटेड प्रोफेसर डॉ. प्रशांत सुरवझाला ने कहा की , ‘हमारे वैज्ञानिक निष्कर्ष वैरिएंट के प्रसार और बड़ी सभाओं से जुड़े लोगों को संक्रमण के अधिक जोखिम को दर्शाते हैं।’

लिंक: https://www.mdpi.com/2673-8112/3/4/35

JOIN

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

For You
- FOLLOW OUR GOOGLE NEWS FEDS -spot_img
डा राम मनोहर लोहिया अवध विश्व विश्वविद्यालय अयोध्या , परीक्षा समय सारणी
spot_img

क्या राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द होने से कांग्रेस को फायदा हो सकता है?

View Results

Loading ... Loading ...
Latest news
प्रभु श्रीरामलला सरकार के शुभ श्रृंगार के अलौकिक दर्शन का लाभ उठाएं राम कथा सुखदाई साधों, राम कथा सुखदाई……. दीपोत्सव 2022 श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने फोटो के साथ बताई राम मंदिर निर्माण की स्थिति