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‘राम’ को जनने कलयुग में कहां जाये ‘सीता’ ! स्वास्थ्य सुविधा को लेकर बेफिक्र है रामराज्य लाने में जुटी सरकार

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‘राम’ को जनने कलयुग में कहां जाये ‘सीता’ !

-स्वास्थ्य सुविधा को लेकर बेफिक्र है रामराज्य लाने में जुटी सरकार

श्रीराम चिकित्सालय में खाली हैं चिकित्सक के 16 पद, मूलभूत सुविधाएं भी नदारद

अयोध्या। आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व वाली नगरी अयोध्या को प्रदेश की सरकार वैश्विक फलक पर लाने की कवायद में जुटी है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर फिर से त्रेता कालीन वैभव और रामराज्य वापस लाने की बात कही जा रही है।

कई अरब रूपये की लागत से श्रीराम का भव्य और दिव्य मंदिर बन रहा है, लेकिन सवाल यह है कि इस कलयुग में ‘राम’ को जनने के लिये ‘सीता’ कहां जाये ? धर्मनगरी में अभी तक प्रसव की समुचित व्यवस्था ही नहीं हो पाई है,क्योंकि बीते पांच वर्षों के कार्यकाल में भाजपा सरकार ने रामनगरी की चिकित्सा व्यवस्था पर ध्यान ही नहीं दिया, जिसके चलते सेहत महकमे की बदहाली खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है।

कहने को तो रामनगरी में एलोपैथी विधि से उपचार के लिए श्रीराम संयुक्त चिकित्सालय के अलावा महिलाओं के लिए राजकीय तुलसी महिला चिकित्सालय तुलसी नगर के साथ आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सा केंद्र संचालित हैं।

महिलाओं के प्रसव और चिकित्सीय सलाह तथा उपचार की बात करें तो श्रीराम संयुक्त चिकित्सालय में महिला चिकित्सक का कोई पद ही सृजित नहीं है। लगभग चार दशक पूर्व समाजसेविका स्वर्गीया श्रीमती के रानी शर्मा ने राजकीय तुलसी महिला चिकित्सालय बनवा कर राज्य सरकार को समर्पित किया था। वर्तमान में इसके सभी वार्ड जर्जर होचुके हैं।

राजकीय तुलसी महिला चिकित्सालय में दो महिला डॉक्टरों के अलावा नर्स और स्टाफ की तैनाती है, लेकिन महिलाओं को परामर्श और उपचार तथा चिकित्सा सेवा केलवल दोपहर दो बजे तक ही मिल पाती है। अस्पताल में महिलाओं के सामान्य डिलीवरी की जैसी तैसी कामचलाऊ व्यवस्था है लेकिन सीरियस और सिजेरियन प्रसव पीडि़त महिलाओं को जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।

उधर रामनगरी की महिलाओं को प्रसव तथा महिला संबंधी उपचार की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए श्रीराम संयुक्त चिकित्सालय बने मारुती प्रसूति गृह का सरकारी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है।

लगभग 20 साल पहले श्रीराम संयुक्त चिकित्सालय परिसर में समाजसेवी लालजी भाई सत्यस्नेही ने मारुति ट्रस्ट लंदन (यूके) के सहयोग से लगभग चालीस लाख रूपए की लागत से मारुति प्रसूति गृह का निर्माण कराया था। मारुति प्रसूति गृह में 10 बेड का वार्ड, आधुनिक आवश्यक मशीन, पंखा, बिजली सहित सारे उपकरण मुहैया कराये गए थे।

तत्कालीन सांसद विनय कटियार व प्रदेश सरकार के स्वास्थ्यमंत्री रमापति शास्त्री की मौजूदगी में तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान ने इस मारुति प्रसूति गृह का उद्घाटन किया था। हलांकि बीते दो दशक में इस मारुति प्रसूति गृह में न तो डॉक्टर, स्टाफ व नर्स सहित अन्य कर्मचारियों का पद सृजित हो पाया और न ही किसी की नियुक्ति।

लाखों की कीमत से बने इस भवन का उपयोग श्रीराम चिकित्सालय प्रबंधन की ओर से ऑपरेशन, दवा वितरण केंद्र सहित अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है। जिसके चलते रामनगरी की महिलाएं प्राइवेट नर्सिंग होम जाने और आर्थिक नुक्सान को मजबूर हैं।

श्रीराम चिकित्सालय में खाली हैं चिकित्सक के 16 पद, मूलभूत सुविधाएं भी नदारद

श्रीराम संयुक्त चिकित्सालय अव्यवस्था व अभाव का शिकार है। चिकित्सालय में 16 चिकित्सक के पद खाली हैं, इन पर प्रशासन द्वारा नियुक्ति नहीं हो पा रही है। रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते लगभग 5 वर्षों से अल्ट्रासाउंड मशीन कमरे में बंद है।मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा और उनको अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बाहर प्राइवेट डाइग्नोस्टिक सेंटर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समय में यहां आईसीयू की नई इमारत का निर्माण कराया गया था लेकिन अभी तक आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता नहीं कराई जा सकी।वर्तमान में अस्पताल प्रबंधन इस आईसीयू भवन का प्रयोग वैक्सीनेशन के लिए कर रहा है। चिकित्सालय परिसर में चिकित्सकों के आवास की व्यवस्था न होने के कारण यहां तैनात सभी चिकित्सक जिला मुख्यालय पर निवास करते हैं।

जिसके चलते ओपीडी के बाद मुख्यालय रवाना हो जाते है और इमरजेंसी ड्यूटी के अलावा कोई चिकित्सक मौजूद नहीं रहता तथा आवश्यकता पडऩे पर विशेषज्ञ डाक्टर उपलब्ध नहीं हो पाते और सीरियस मरीज को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। सरकार की ओर से मरीजों के तीमारदारों के ठहरने के लिए बहुमंजिला इमारत रैन बसेरा बनवाया गया है लेकिन इसका उपयोग चिकित्सालय के कर्मचारियों की ओर से किया जा रहा है।

मूलभूत सुविधाओं की बात करें तो मरीजों और तीमारदारों को पीने का शुद्ध पानी भी मुहैया नहीं है। परिसर में शुद्ध पेयजल के लिये कई उपकरण लगे हैं लेकिन किसी में शुद्ध पानी नहीं आ रहा। प्राचीन इमारत के सामने स्थित पार्क में दो चेंबर बने हैं, जिनमें एक पूरी तरह से खराब है और दूसरे में गरम पानी आता है। यहां गंदगी का अंबार है।

तीन-चार वर्ष पूर्व राजकीय निर्माण निगम की ओर से चिकित्सालय में एक कक्ष बनवाया गया था,लेकिन उसमें अभी तक जलाापूर्ति की व्यवस्था नहीं हो पाई। नई इमारत के पास एक इंडिया मार्क 2 हैंड पंप लगा है, लेकिन कीचड़ और गंदगी के चलते कोई वहां पानी लेने और पीने नहीं जाता। मरीजों व उनके तीमारदार बाहर से पानी की बोतल अथवा निगम की वाटर सप्लाई की बाहर लगी टोंटी से पानी लेने को मजबूर हैं।

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