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विश्वविद्यालयों को कैम्पस की परिधि से बाहर निकलकर कार्य करने की ज़रूरत, पिछड़ों व वंचितों के कल्याण के लिए काम करें संस्थानः राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल

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विश्वविद्यालयों को कैम्पस की परिधि से बाहर निकलकर कार्य करने की ज़रूरत, पिछड़ों व वंचितों के कल्याण के लिए काम करें संस्थानः उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल

· केन्द्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री डॉ. विरेन्द्र कुमार तथा उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में किया डॉ. अंबेडकर उत्कृष्टता केन्द्र का शुभारंभ

· डॉ. विरेन्द्र कुमार ने किया शिक्षाविदों का आह्वान, संसाधनों की कमी से जूझ रहे प्रतिभावान विद्यार्थियों की मदद व उत्साहवर्धन का लें संकल्प

· प्रो. सुधीर कुमार जैनः महामना ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय जैसे समावेशी संस्थान की स्थापना की, इस योजना के शुभारंभ के लिए बीएचयू सबसे उचित स्थान

वाराणसी,: विश्वविद्यालयों व शैक्षणिक संस्थानों को अपने कैम्पस की परिधि से बाहर निकलकर, उन लोगों के उत्थान एवं कल्याण के लिए काम करने की आवश्यकता है जो अब भी पिछड़े तथा वंचित हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शुक्रवार को डॉ. अंबेडकर उत्कृष्टता केन्द्र के राष्ट्रव्यापी शुभारंभ के लिए एकत्रित हुए केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, वरिष्ठ शिक्षाविदों तथा शिक्षक समुदाय के सदस्यों को उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल का यही संदेश था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने पिछड़ों, वंचितों तथा विकास की दौर में पीछे छूट गए वर्गों को शिक्षित करने, उनके सशक्तिकरण तथा कल्याण में विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका की चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों, शोधार्थियों तथा छात्रों का आह्वान किया कि वे विश्वविद्यालयों के परिसरों से बाहर निकल कर गांवों तथा पिछड़े क्षेत्रों में जाएं, वहां निर्धनों, महिलाओं व बच्चों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझें तथा उन समस्याओं के निराकरण के तरीके सुझाएँ। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय व कॉलेज गांवों व आंगबाड़ियों को गोद लेकर उनके विकास में योगदान दे रहे हैं, उसी प्रकार देश के अन्य हिस्सों में भी विश्वविद्यालयों व संस्थानों को प्रयास करने चाहिए, ऐसा करने से हम उन लोगों के जीवन में वास्तविक सकारात्मक बदलाव को अनुभव कर सकेंगे, जो आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी एक बेहतर ज़िंदगी तथा बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्षरत हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की चर्चा करते हुए राज्यपाल महोदया ने कहा कि यह सामाजिक रूप से पिछड़ों के उत्थान की योजना का ख़ाका खींचती है। बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराना इसी का उदाहरण है। जब बच्चे अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करेंगे, तो वे और प्रभावी ढंग से शिक्षा ग्रहण कर पाएंगे, जिसके परिणामस्वरूप वे प्रगति की ओर अग्रसर होंगे, जो अंततः समाज व राष्ट्र के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

महामहिम राज्यपाल तथा माननीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री, भारत सरकार, डॉ. विरेन्द्र कुमार ने डॉ. अंबेडकर उत्कृष्टता केन्द्र का देशव्यापी शुभारंभ किया। ये केन्द्र 31 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में स्थापित किये जा रहे हैं और इनमें अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक केन्द्र को सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय, डॉ अंबेडकर प्रतिष्ठान के माध्यम से हर वर्ष 75 लाख रुपये की धनराशि मुहैया कराएगा। कार्यक्रम में ड़ॉ. अंबेडकर प्रतिष्ठान, नई दिल्ली, तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों के बीच डॉ अंबेडकर उत्कृष्टता केन्द्र तथा डॉ अंबेडकर पीठ योजनाओं को लेकर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर व आदान प्रदान हुआ। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से कुलसचिव प्रो. ए. के. सिंह ने सहमति पत्र का आदान प्रदान किया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, से कुलपति प्रो. शांतिश्री पंडित ने सहमति पत्र के आदान प्रदान के लिए उपस्थित रहीं। इस अवसर पर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन से डॉ. नीतू जैन तथा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से डॉ. संजय कुमार ध्यानी ने अपने विश्वविद्यालयों में इस योजना की भावी रूपरेखा पर प्रस्तुतियाँ दीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री डॉ. विरेन्द्र कुमार ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व के परिणामस्वरूप देश में पिछड़ों व वंचितों के कल्याण के लिए कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि डॉ अंबेडकर उत्कृष्टता केन्द्र तथा डॉ अंबेडकर पीठ योजनाएँ सामाजिक न्याय व समानता के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ये योजनाएँ सिर्फ़ अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को ही सशक्त नहीं करेंगी, बल्कि उनके परिवारों और अंततः समाज व देश के विकास का भी मार्ग प्रशस्त करेंगी। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षाविदों का आह्वान किया कि वे अपने संस्थानों में वंचित व पिछड़े वर्ग के प्रतिभावान विद्यार्थियों के उत्थान व कल्याण के लिए काम करने का संकल्प लेकर जाएँ। उन्होंने अनुसूचित जाति व पिछड़े तथा वंचित वर्गों के लिए अपने मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया और कहा कि ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शिता तथा कुशल नेतृत्व ही है, जिसके परिणामस्वरूप आज पिछड़े वर्गों के कल्याण की दिशा में प्रभावी कार्य हो रहा है, तथा उसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

केन्द्रीय राज्य मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, सुश्री प्रतिमा भौमिक ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उन्हें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय जैसे वैश्विक ख्याति प्राप्त संस्थान में देश के प्रमुख शिक्षाविदों को संबोधित करने का अवसर मिलेगा, लेकिन आज यह भी संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि यह पिछड़ों व वंचितों के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी की संवेदनशीलता का ही नतीजा है कि आज हमें अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने शिक्षाविदों के अपील की कि वे देश को प्रगति व प्रसिद्धि के नए शिखर पर पहुँचाने के लिए जी जान से काम करें, क्योंकि वे एक बहुत महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी का निर्वाहन कर रहे हैं और वह है विद्यार्थियों को शिक्षित करना व देश के भविष्य की नींव रखना।

इन योजनाओं के शुभारंभ को एक यादगार लम्हा बताते हुए केन्द्रीय राज्य मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, ए. नारायणस्वामी ने कहा कि यह सही समय पर, सही दिशा में लिया गया, सही निर्णय है, जिससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास तथा सबका प्रयास” के लक्ष्य को हासिल करने में निश्चित रूप से मदद मिलेगी।

कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, प्रो. सुधीर कुमार जैन ने इन योजनाओं के शुभारंभ के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का चयन करने के लिए भारत सरकार तथा सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय का धन्यवाद जताया। उन्होंने कहा कि भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी द्वारा स्थापित सर्वविद्या की राजधानी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय अत्यंत ही समावेशी संस्थान है, ऐसे में इन योजनाओं का यहाँ से शुभारंभ होना इस अवसर को और भी ख़ास बना देता है। उन्होंने कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए सभी कुलपतियों तथा शिक्षाविदों को बीएचयू को एक वृहद् दृष्टिकोण से देखने व घूमने का आह्वान किया कि कैसे यह संस्थान विविध पाठ्यक्रमों में शिक्षा देकर दशकों से राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगा है। उन्होंने कहा कि एक शताब्दी से भी अधिक समय पूर्व महामना ने बीएचयू को स्थापित किया था और आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में हम महामना के महान विचारों की झलक देखते हैं।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि जाने माने एजुकेटर तथा सुपर 30 समूह के संस्थापक आनंद कुमार ने योजना की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज में समानता के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा क़दम है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के सपनों को सामाजिक समानता हासिल करके ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने अपने छात्र जीवन के दिनों को भावुक होकर याद करते हुए कहा कि उन्हें अच्छी पुस्तकें व पठन सामग्री नहीं मिल पाती थी और वे चोरी छिपे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के केन्द्रीय ग्रंथालय में जाते थे व पुस्तकें पढ़ते थे। उन्होंने कहा कि आज उसी केन्द्रीय ग्रंथालय के सामने स्थित सभागार में अपने विचार रखना उनके लिए एक बेहद यादगार व विशेष क्षण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह योजना समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

सचिव, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, आर. सुब्रमण्यम ने मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मंत्रालय हर वर्ष 2 करोड़ विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा तक सुगम पंहुच के लिए सहायता प्रदान कर रहा है।

प्रो. संगीता पंडित ने कार्यक्रम का संचालन किया। विकास त्रिवेदी, निदेशक, डॉ. अंबेडकर प्रतिष्ठान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रेषित किया।

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