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Wednesday, May 25, 2022

विश्वविद्यालय के पुरातन छात्रों की जड़े विदेशों तक फैली : कुलपति

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विश्वविद्यालय के पुरातन छात्रों की जड़े विदेशों तक फैली- कुलपति

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में 30 अप्रैल और 1 मई को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पुरातन छात्र सम्मेलन को सफल बनाने के लिए कुलपति प्रो राजेश ‌सिंह के मार्गदर्शन में एक बैठक का आयोजन प्रशासनिक भवन स्थित कमेटी हाल में किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र ‌डॉ. विभ्राट चंद कौशिक के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र शामिल हुए। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन के पहल की सराहना करते हुए हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया।
कुलपति प्रो. राजेेश सिंह ने कहा कि डीडीयूजीयू पूर्वांचल के ख्यातिलब्ध संस्थानों में से एक है। इसकी जड़े देश के साथ-साथ विदेशों में भी फैली हैं। पुरातन छात्र सम्मेलन एक छोटा सा प्रयास हैं अपने पुरातन छात्रों को विश्वविद्यालय से जोड़ने का। पहले चरण में पूर्वांचल के पुरातन छात्रों को विश्वविद्यालय से जोड़ा जाएगा। दूसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय पुरातन छात्र सम्मेलन का आयोजन वृहद पैमाने पर होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने की ओर से अपने अति‌ वि‌शिष्ट पुरातन छात्रों को डिस्टिंगविश एल्युमिनस अवार्ड से भी नवाजा जाएगा। ‌ विश्वविद्यालय को क्यूएस वर्ल्ड रैकिंग में भी देशभर में 96वीं और प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में पहला स्थान मिला। क्यूएस ने 1.30 लाख शिक्षाविदों का ऐसा डाटाबेस तैयार किया है। जो संस्थान के लिए वोटिंग करते हैं। निश्चित रूप से इन ‌शिक्षाविदों में गोरखपुर विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र भी हैं। जिन्होंने हमें वोट किया।
पुरातन छात्र डॉ विभ्राट चंद कौशिक ने कहा कि कुलपति जी की अगुवाई में नया इतिहास बनने जा रहा है। किसी भी संस्था के रीढ़ की हड्डी उसके पुरातन छात्र होते हैं। यहां के पढ़े विद्यार्थी एसडीएम, एडीएम के साथ बड़ी संख्या में पुलिस विभाग के विभिन्न पदों पर कार्यरत है। इस विश्वविद्यालय का छात्र होने पर खुद को गौरवान्वित महसूस करता हूं। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र शाही ने कहा कि कल्पनाथ राय, राजनाथ सिंह, रवींद्र सिंह सरीखे कई नामचीन नेता विश्वविद्यालय ने देश को दिया है। इस पहल की जितनी भी सराहना करें कम हैं।
डॉ संजयन त्रिपाठी ने कहा कि 33 साल बाद विश्वविद्यालय ने याद किया है। सम्मेलन को सफल बनाने में हर संभव मदद की जाएगी। पुरातन छात्रों को जोड़ने के लिए विभागों को निर्देश दिया जाए। पूर्व अध्यक्ष डॉ सत्यपाल पाल ने कहा कि यह विश्वविद्यालय पूर्वांचल की जान और शान है। संचालन प्रो अजय सिंह ने किया। आभार ज्ञापन पुरातन छात्र परिषद के अध्यक्ष प्रो एसके सिंह ने किया। बैठक में डॉ राजेश द्विवेदी, डॉ सांवले मिश्र, डॉ दिवाकर सिंह, डॉ आमोद कुमार राय, रमेंद्र प्रताप चंद, सोमनाथ सिंह सोनू, भूपेंद्र सिंह, विवेक कुमार शाही, डॉ राकेश प्रताप सिंह, प्रवीण कुमार शाही आदि लोग मौजूद रहे।

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