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Saturday, December 3, 2022

श्री हरि नाम संकीर्तन यह सोचकर करना चाहिए कि हम कल रहे या ना रहे :आलोकानंद जी महाराज

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श्री हरि नाम संकीर्तन यह सोचकर करना चाहिए कि हम कल रहे या ना रहे :आलोकानंद जी महाराज

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श्री हरि नाम संकीर्तन यह सोचकर करना चाहिए कि हम कल रहे या ना रहे :आलोकानंद जी महाराज

मनुष्य को अजर और अमर समझकर विद्या अध्ययन करना चाहिए ,और श्री हरि नाम संकीर्तन यह सोचकर करना चाहिए कि हम कल रहे या ना रहे

रुदौली (अयोध्या) ;  काम, क्रोध मद, लोभ मोह, यह सब नरक के द्वार बताए गए हैं यह सभी अवगुण मनुष्य के पतन का कारण है। गरीबों व समाज की सेवा करने के बाद मनुष्य मरकर भी अमर हो जाता है वर्तमान भौतिक युग में कोई सुखी नजर नहीं आता है चाहे वह धनवान हो या निर्धन हो। केवल सुखी वही है जिसके पास राम नाम संकीर्तन रूपी धन है ।अपनी अमृत मई वाणी रुदौली नगर के काजीपुरा मोहल्ले में स्थित नर्वदेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस पर अयोध्या से पधारे बाल कथा व्यास श्री आलोकानंद जी महाराज ने कहा ।

श्रीमद् भागवत कथा का वर्णन करते हुए कहा कि कंस के बुलावे पर जब अक्रूर जी श्री कृष्ण जी व बलराम को लेकर मथुरा की ओर प्रस्थान करते हैं यमुना में स्नान करते समय अक्रूर जी को श्री कृष्ण जी के रूप में साक्षात परम ब्रह्म दृष्टि गोचर होते हैं उसी समय अक्रूरजी ने समझ लिया कि अब कंस का वध श्री कृष्ण जी द्वारा निश्चित है । मथुरा में कंस के आदेश से जब मल्ल युद्ध प्रारंभ हुआ श्री कृष्ण और बलराम ने चारुढ ,और मुष्टि नाम के पहलवान को मार गिराया। क्रोधित होकर कंस जब तलवार लेकर श्री कृष्ण की ओर दौड़ा श्री कृष्ण ने मुस्तिक प्रहार से उसका बध कर दिया ।

उसके बाद महाराज उग्रसेन को कारागार से निकाल कर पुनः मथुरा के सिंहासन पर प्रतिष्ठित किया ।कथा व्यास जी ने श्री कन्हैया के वृंदावन छोड़कर मथुरा जाने पर विरह वेदना से व्याकुल गोपियों की मार्मिक कथा का जब अपने मुखर बिंदु से संगीतमय रूप से वर्णन किया तो कथा स्थल पर उपस्थित सभी श्रोताओं के नयन सजल हो गए ।उन्होंने कहा की भगवान ही अपनी लीला को जाने यह मनुष्य के बस में नहीं है ,केवल हम उनकी चर्चा, कथा कह व सुनकर आत्म विभोर होते है ।

श्री कृष्ण के द्वाराने अष्टासुर नामक राक्षस के बध की कथा सुनाते हुए कहा की यह पूर्व जन्म में गुरु बृहस्पति का शिष्य था श्राप वश राक्षस हो गया था । कालचक्र से कोई नहीं बचा काल की नियत के ही कारण देवकी की आठवीं संतान कंस के लिए काल बन गई उन्होंने श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह का मार्मिक चित्रण मंच से किया चारी ओर से श्री कृष्ण और माता रुक्मणी की जय जयकार होने लगी मंच पर पुष्प वर्षा होने लगी संगीत मई सुमधुर विवाह गीत जब प्रस्तुत किया गया तो उपस्थित सभी श्रोता हर्षातिरेक आनंदित हो गए

कथा में मुख्य यजमान किरण चंद्र मिश्र सपत्नीक, उनके पुत्र परितोष मिश्र, सपत्नीक विद्यमान थे । मंच विधायक रामचंद्र यादव ने व्यास जी को अंग वस्त्र देकर सम्मान किया भाजपा रुदौली नगर के पूर्व अध्यक्ष शतींद्र प्रकाश शास्त्री, व्यापार मंडल के महामंत्री व भाजपा नेता राजेश गुप्त, व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष राजेश वैश्य,भाजपा नगर महामंत्री मनीष आर्य, को कथा ब्यास जी ने राम नामी अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया ।अन्य प्रमुख उपस्थित लोगों में विंध्यवासिनी प्रसाद मनीष तिवारी मृदुल मनोहर अग्रवाल राकेश बंसल मनीष चौरसिया अमित कौशल , राजकिशोर संतोष यादव प्रदीप मिश्रा अतुल मिश्रा संतोष आर्य सहित भारी भारी संख्या में लोग मौजूद थे

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