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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, माताओं को मिली जीवन की सुरक्षा

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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, माताओं को मिली जीवन की सुरक्षा

केंद्र सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय जीवन चक्र आधारित (लाइफ साइकिल बेस्ड) दृष्टिकोण अपनाया है। सरकारी कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला बचपन से वयस्कता और वयस्कता से वृद्धावस्था तक विभिन्न जीवन चरणों में महिलाओं की सहायता करती है। ये सरकारी प्रोग्राम महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करते हैं। इसके लिए हर कदम पर, महिलाओं की पसंद को बढ़ाने में मदद करने के साथ-साथ उन निर्णयों को उनके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए सशक्त बनाने के अवसर खोले जाते हैं। इस चक्र में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण चरण है। इसलिए इस सेक्टर पर खास फोकस किया गया है। इस विशेष फोकस के परिणाम आज हम सभी के सामने हैं।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ क्या है : राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के निर्देशों के तहत -गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और जच्चा-बच्चा (मां व संतान) को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने के लिए Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana शुरू की गई है। 01 जनवरी 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे लांच किया था।इसके माध्यम से हर गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिला को 6000 रुपए तक आर्थिक मदद दी जाती है। देश के सभी जिलों में इसे लागू किया गया है। Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana का संचालन आंगनवाड़ी केंद्रों या स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों के माध्यम से होता है। इस योजना का लाभ सभी आय वर्ग (All Income Class) की गर्भवती महिलाओं को मिल सकता है।

लाभार्थी महिलाओं को सरकार से ​मिलने वाली मदद तीन किस्तों मेें मिलेगी।

किस्त का क्रम

कब मिलेगी

किस्त की राशि

पहली किस्त

आंगनवाड़ी केंद्र या अनुमोदित स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में गर्भधारण का पंजीकरण कराने पर (गर्भ के 150 दिनों के अंदर)

1,000 रुपये

दूसरी किस्त

गर्भधारण के छह माह बाद कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच कराने पर (गर्भ के 180 दिनों के अंदर)

2,000 रुपये

तीसरी किस्त

बच्चे के जन्म का पंजीकरण कराने तथा बच्चे को बीसीजी, ओपीवी, डीपीटी और हैपेटाइटिस बी आदि टीकों का प्रथम चक्र पूरा होने पर

2,000 रुपये

शेष 1000 रुपए का भुगतान:  Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana के ​तहत तीन किस्तों में 5000 रुपए ही मिलते हैं। लेकिन लाभार्थी महिला के किसी संस्था (सरकारी या अनुमोदित अस्पताल) में प्रसव कराने पर जननी सुरक्षा योजना के तहत 1000 रुपए की मदद अतिरिक्त रूप से मिलती है। इस प्रकार प्रत्येक महिला को कुल 6000 रुपए तक मातृत्व लाभ दिया जाता है।

एमएमआर और आईएमआर में गिरावट

इस क्रम में केंद्र सरकार की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2011-13 में 167 से गिरकर 2017-19 में 103 हो गया। इसी प्रकार, राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर यानि आईएमआर 2015 में 37/1,000 से घटकर 2019 में 30/1,000 हो गई।

भारत 2020 तक 100/लाख लाइव बर्थ के अपने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लक्ष्य और 2030 तक 70/लाख लाइव बर्थ के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDG) को प्राप्त करने के लिए ट्रैक पर है। देश को जल्द ही मातृ मृत्यु अनुपात के SDG लक्ष्य को प्राप्त करने की भी उम्मीद है।

क्यों हुई आईएमआर और एमएमआर में गिरावट ?

देखा जाए तो पिछले आठ वर्षों में, भारत के मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में सुधार करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं से ही आज धरातल पर बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं इनके बारे में…

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए)

”प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान” हर महीने के 9वें दिन मुफ्त गुणवत्ता वाली प्रसवपूर्व देखभाल प्रदान करके मातृ और नवजात मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए काम कर रही है। देशभर में पीएमएसएमए सेवाएं प्रदान करने वाली 19,215 सुविधाओं में 3.2 करोड़ से अधिक प्रसव पूर्व जांच की गई। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस दौरान विशेष रूप से, लगभग 24.56 लाख उच्च जोखिम वाले गर्भधारण की पहचान की गई और समय रहते उनका इलाज किया गया।

निःशुल्क प्रसव पूर्व जांच और संस्थागत प्रसव में वृद्धि का प्रभाव आया सामने

नतीजतन, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) ने बताया है कि एनएफएचएस-4 और एनएफएचएस-5 के बीच पहली तिमाही में गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व सेंटर पर विजिट 59% से बढ़कर 70% हो गया। इसके अलावा, संस्थागत जन्म (इंस्टीट्यूशनल बर्थ) 79% से बढ़कर 89% हो गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 87% संस्थागत जन्म हुए, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 94% से अधिक थे।

Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana का फायदा पहली बार मां बनने वाली महिला या पहले जीवित बच्चे के मामले में ही मिलता है। वास्तव में यह योजना किसी एक महिला को एक बार ही मदद की सभी किस्तें पाने का हक देती है। गर्भपात/मृत जन्म या शिशु मृत्यु की स्थिति में निम्नलिखित तरीकों से लागू होंगे—

गर्भपात के मामले में: गर्भपात होने पर लाभार्थी महिला की बची हुई किस्तें, आगे कभी गर्भधारण की स्थिति में प्राप्त की जा सकती हैं। बाद के गर्भधारण के दौरान वे किस्तें दोबारा नहीं मिलेंगी, ​जो पहले वाले गर्भधारण के दौरान उसे मिल चुकी हैं। उदाहरण के लिए किसी महिला को पहले गर्भधारण के दौरान Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana की पहली किस्त मिल चुकी है। इसके बाद अगर उसका गर्भपात होता है तो उसे अगले गर्भधारण व संतान उत्पत्ति के दौरान सिर्फ दूसरी व तीसरी किस्त मिल सकेगी।
मृत शिशु जन्म के मामले में: मृत शिशु पैदा होने की स्थिति में भी यही नियम लागू होंगे। यानी कि जो किस्तें पहले मिल चुकी हैं, वे दोबारा नहीं मिलेंगी और जो किस्ते पहले नहीं ​प्राप्त की गई हैं, उनके लिए अगले गर्भधारण की स्थिति में क्लेम किया जा सकता है।
शिशु मृत्यु के मामले में: शिशु की मृत्यु हो जाने की स्थिति में भी Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana का लाभ पाने के नियम इसी प्रकार रहेंगे। अगर, लाभार्थी महिला ने Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana के तहत मिलने वाली सभी किस्तें प्राप्त कर ली हैं तो अगले गर्भधारण व संतान को जन्म देने की स्थिति में वह किसी प्रकार के लाभ का दावा नहीं कर सकती। अगर कोई किस्त बची हुई है तो उसे वह बाद में क्लेम कर सकती है।

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन)

इस पहल में मातृ और नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के आश्वासन वितरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें नि:शुल्क व्यापक स्वास्थ्य पहुंच और गुणवत्ता परक देखभाल सेवाएं, सेवाओं के इनकार के लिए शून्य सहिष्णुता तथा महिलाओं के आत्म निर्णय, गरिमा, भावना, चयन और प्राथमिकता आदि के लिए सम्मान के साथ-साथ जटिलताओं के आश्वासन प्रबंधन को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सभी निवारणीय मातृ एवं शिशु मृत्यु और रुग्णता समाप्त करने और सकारात्मक प्रसव अनुभव प्रदान करने के क्रम में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले प्रत्येक शिशु और महिला के लिए सेवाओं से इनकार के लिए शून्य सहिष्णुता और आश्वासन युक्त, गरिमामय, सम्मान परक और निशुल्क गुणवत्ता परक स्वास्थ्य देखभाल करना है। ”सुमन योजना” के तहत पहले ही 9,944 सुविधाओं को अधिसूचित किया जा चुका है।

लक्ष्य

यह पहल प्रसव कक्ष और प्रसूति ऑपरेशन थिएटर में देखभाल की गुणवत्ता में सुधार करती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और प्रसव के तुरंत बाद गुणवत्तापूर्ण देखभाल मिले। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय प्रमाणित 418 लेबर रूम और 345 मैटरनिटी ऑपरेशन थिएटर हैं।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY)

आर्थिक और सामाजिक संकट के कारण कई महिलाएं गर्भावस्था के अंतिम दिनों तक अपने परिवार के लिए काम करती रहती हैं। कई बार, उन्हें बच्चे के जन्म के तुरंत बाद काम फिर से शुरू करने के लिए भी मजबूर किया जाता है, इस प्रकार उनके शरीर को पूरी तरह से ठीक होने से रुकावट होती है और शिशु को स्तनपान से वंचित किया जाता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए PMMVY ने अब तक 2.6 करोड़ से अधिक महिलाओं की मदद की है। केंद्र सरकार द्वारा इन महिलाओं के बैंक/ डाकघर खातों में सीधे 6,000 रुपए की राशि जमा की गई है। यह राशि उनकी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है या उन्हें कुछ और दिनों तक काम करने से बचने और बच्चे के साथ रहने में मदद के रूप में मदद कर सकती है।

मिशन इन्द्रधनुष

पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और शिशुओं के टीकाकरण की दिशा में भी काफी काम किया है। ”मिशन इंद्रधनुष” के तहत लगभग 1 करोड़ गर्भवती महिलाओं और 4.1 करोड़ बच्चों का टीकाकरण किया गया है।

कोविड महामारी के बावजूद, सरकार ने यह नियमित टीकाकरण कार्यक्रम जारी रखा। इसके तहत टीकाकरण से चूकने वाली गर्भवती और बच्चों तक पहुंचने के लिए फरवरी-मार्च 2021 में मिशन इंद्रधनुष के दो दौर आयोजित किए। इन राउंड में करीब 9.5 लाख बच्चों और 2.2 लाख गर्भवती का टीकाकरण किया गया। अप्रैल 2021 से फरवरी 2022 के बीच 30 लाख और बच्चों का टीकाकरण किया गया।

पोषण अभियान

कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए 2018 में ”पोषण अभियान” शुरू किया गया। यह योजना किशोरों, बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण स्थिति में सुधार लाने पर केंद्रित है। 12.27 लाख आंगनवाड़ियों ने पोषण ट्रैकर पर लगभग 9.85 करोड़ लाभार्थियों को कवर करते हुए डेटा अपलोड किया है। पोषण अभियान के तहत हो रहे कार्यों को बरकरार रखने की मंशा से केंद्र सरकार पहले ही इसके लिए वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 54,000 करोड़ रुपए निर्धारित कर चुकी है।

इस प्रकार गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए संस्थागत प्रसव और नियमित स्वास्थ्य जांच को प्रोत्साहित करने से लेकर पोषण प्रोत्साहन से लेकर टीकाकरण तक, केंद्र सरकार द्वारा बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है। इस दृष्टिकोण का प्रभाव कई परिणामों में स्पष्ट हुआ है, जैसे जन्म के समय बेहतर लिंगानुपात, संस्थागत प्रसव में वृद्धि, शिशु मृत्यु दर में गिरावट और मातृ मृत्यु दर में कमी। इससे साफ है कि बीते 8 साल में महिलाओं के केंद्र सरकार से काफी मदद मिली है।

Apply के साथ निम्नलिखित दस्तावेज जमा किए जाने आवश्यक हैं

आधार कार्ड की फोटोकॉपी: लाभार्थी महिला और उसके पति के Aadhaar Card की फोटोकॉपी संलग्न की जानी चाहिए। महिला लाभार्थी की पहचान प्रमाण में यह सबसे पुख्ता दस्तावेज है। आधार न होने पर उसके लिए Apply के बाद मिली आधार नामांकन संख्या दर्ज करनी होगी और पहचान प्रमाण का कोई अन्य वैध दस्तावेज उपलब्ध कराना होगा। ऐसे मान्य दस्तावेजों की सूची हमने आगे दे रखी है
बैंक या पोस्ट ऑफिस खाता की पासबुक: लाभार्थी महिला के बैंक अकाउंट या डाकघर अकाउंट की फोटोयुक्त पासबुक की फोटोकॉपी।इसी खाते में सरकार की ओर से भेजी गई मदद की राशि भेजी जाएगी। Bank Account या पोस्ट Post Office Account आधार से लिंक भी कराया जाना चाहिए।
आधार न होने पर पहचान संबंधी अन्य विकल्प: लाभार्थी महिला व उसके पति, जिसका भी आधार नंबर उपलब्ध नहीं हो सका है, उसे अपनी पहचान प्रमाण के लिए रूप में निम्नलिखित में से किसी एक दस्तावेज की फोटोकॉपी संलग्न कर सकते हैं—
मतदाता पहचान पत्र
राशन कार्ड
पैन कार्ड
बैंक पासबुक
ड्राइविंग लाइसेंस
मनरेगा जॉब कार्ड
किसान फोटो पासबुक
पीचएसी या सरकारी अस्पताल से जारी स्वास्थ्य कार्ड
सरकारी विभाग/कंपनी/संस्थान से जारी कर्मचारी पहचान पत्र
कोई अन्य सरकारी फोटो व अन्य विवरण युक्त दस्तावेज
गजटेड ऑफीसर के लेटरहेड पर जारी फोटोयुक्त पहचान प्रमाण

क्लेम के 30 दिन के अंदर खाते में पहुंचेगा पैसा : Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana के तहत ठीक प्रकार से भरे हुए फॉर्म के साथ क्लेम किए जाने के बाद अधिकतम 30 दिन के भीतर उसे मदद राशि मिल जानी चाहिए। सभी किस्तें सीधे लाभार्थी के Bank Account में भेजी जाएंगी।

कहां करें Apply

आंगनवाड़ी केंद्र: जिन राज्यों में कुपोषण मिटाने की योजना आईसीडीएस (समेकित बाल विकास सेवाएं. महिला एवं बाल विकास विभाग/ समाज कल्याण विभाग के माध्यम से लागू की जा रही है, वहां आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana संचालित होगी।

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स्वास्थ्य सुविधा केंद्र: जिन राज्यों में कुपोषण मिटाने की योजना आईसीडीएस (समेकित बाल विकास सेवाएं) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के माध्यम से लागू की जा रही है, वहां Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana को स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

Apply के लिए अर्हता व जरूरी दस्तावेज
Pradhan Mantri Matri Vandana Yojana Form को भरने के लिए महिला की आयु 19 साल से अधिक होनी चाहिए। मदद की तीनों किस्तों के क्लेम के लिए अलग-अलग फार्म भरे जाएंगे।

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