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Saturday, December 3, 2022

पीपल अकेला ऐसा पौधा जो दिन और रात दोनो समय आक्सीजन देता है….?

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ीपल के पत्तो पर भोजन करे, लीवर ठीक हो जाता है

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पीपल अकेला ऐसा पौधा जो दिन और रात दोनो समय आक्सीजन देता है

पीपल के ताजा 6-7 पत्ते लेकर 400 ग्राम पानी मे डालकर 100 ग्राम रहने तक उबाले,ठंडा होने पर पिए ब्रर्तन स्टील और एल्युमिनियम का नहीं हो, आपका ह्रदय एक ही दिन में ठीक होना शुरू हो जाएगा

पीपल के पत्तो पर भोजन करे, लीवर ठीक हो जाता है

पीपल के सूखे पत्तों का पाउडर बनाकर आधा चम्मच गुड़ में मिलाकर सुबह दोपहर शाम खायेँ, किंतना भी पुराना दमा ठीक कर देता है

पीपल के ताजा 4-5 पत्ते लेकर पीसकर पानी मे मिलाकर पिलाये,1- 2 बार मे ही पीलिया में आराम देना शुरू कर देता है

पीपल की छाल को गंगाजल में घिसकर घाव में लगाये तुरंत आराम देता है

पीपल की छाल को खांड (चीनी )मिलाकर दिन में 5-6 बार चूसे, कोई भी नशा छूट जाता है

पीपल के पत्तों का काढ़ा पिये, फेफड़ो, दिल ,अमाशय और लीवर के सभी रोग ठीक कर देता है

पीपल के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिये, किडनी के रोग ठीक कर देता है व पथरी को तोड़कर बाहर करता है

किंतना भी डिप्रेशन हो, पीपल के पेड़ के नीचे जाकर रोज 30 मिनट बैठिए डिप्रेशन खत्म कर देता है

पीपल की फल और ताजा कोपले लेकर बराबर मात्रा में लेकर पीसकर सुखाकर खांड मिलाकर दिन में 2 बार ले, महिलाओ के गर्भशाय और मासिक समय के सभी रोग ठीक करता है

पीपल का फल और ताजा कोपले लेकर बराबर मात्रा में लेकर पीसकर सुखाकर खांड मिलाकर दिन में 2 बार ले, बच्चो का तुतलाना ठीक कर देता है और दिमाग बहुत तेज करता है

जिन बच्चो में हाइपर एक्टिविटी होती है, जो बच्चे दिनभर रातभर दौड़ते भागते है सोते कम है, पीपल के पेड़ के नीचे बैठाइए सब ठीक कर देता है

किंतना भी पुराना घुटनो का दर्द हो, पीपल के नीचे बैठे 30-45 दिन में सब खत्म हो जाएगा

शरीर मे कही से भी खून आये, महिलाओ को मासिक समय मे रक्त अधिक आता हो, बाबासीर में रक्त आता हो, दांत निकलवाने पर रक्त आये ,चोट लग जाये, 8-10 पत्ते पीसकर,छानकर पी जाएं, तुंरत रक्त का बहना बंद कर देता है

शरीर मे कही भी सूजन हो, दर्द हो, पीपल के पत्तों को गर्म करके बांध दे, ठीक हो जायेगे…

आपने लोगो से कई बार सुना होगा कि पीपल का पेड़ रात में ऑक्सीजन उत्सर्जित(छोड़ता) करता है। कहा जाता है यह पेड़ दिन और रात दोनो समय ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है। शायद इसीलिए एक वजह यह भी है कि पीपल को धार्मिक महत्व का सम्मान दिया जाता है।

पता नहीं पीपल के पेड़ के विषय में यह भ्रामक बात कैसे फैल गयी कि वह रात में ऑक्सीजन छोड़ता है ? आपको बता दे ऐसा कोई भी पेड़ नही है जो रात में ऑक्सीजन दे सकें। किसी भी पेड़ की ऑक्सीजन उत्सर्जित करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है वो है प्रकाश संश्लेषण और वो सूर्य की उपस्थिति में ही संभव है। जिसके लिए पेड़ के पास हरी पत्तिया यानी क्लोरोफिल (हरा रंजक) होना बेहद जरूरी है।यही वजह है कि कोई भी पेड़ रात में ऑक्सीजन का उत्सर्जन नहीं कर सकता है। सरल शब्दों में समझे तो ऑक्सीजन यानी O2 प्रकाश संश्लेषण का एक उत्पाद है, जो कुछ दुर्लभ, गहरे समुद्र में रहने वाले जीवाणुओ को अगर छोड़ दिये जायें तो ये केवल हरे पौधों में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में सम्भव होता है। चांद की रोशनी, गरमागरम या फ्लोरोसेंट लाइट बल्ब, मोमबत्ती की रोशनी आदि प्रकाश के स्त्रोत प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए आवश्यक तरंगदैर्ध्य की प्रकाश ऊर्जा उत्पन्न नहीं कर सकते है। जिससे ऑक्सीजन का निर्माण हो सके। इसलिए ऐसा संभव ही नही है कि कोई पेड़ रात में ऑक्सीजन का उत्सर्जन कर सके।

इंसान से लेकर सभी जानवर की तरह पेड़-पौधे भी सांस चौबीस घंटे लेते हैं. इस क्रिया में वे ऑक्सीजन वायुमण्डल से लेते हैं और कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं.जी हां पेड़ पौधे भी सांस लेने के लिए ऑक्सीजन ग्रहण करते है और कार्बनडाई ऑक्साइड छोड़ते है लेकिन उनकी एक बात अलग है कि वे सूर्य के प्रकाश में एक और महत्त्वपूर्ण क्रिया करते हैं,जिसे प्रकाश संश्लेषण कहा जाता है।
इस क्रिया में वे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। भोजन माने ग्लूकोज … जो हर एक जीवधारी के जीवन का भौतिक आधार है। है। ये हरे पेड़ पौधे वायुमण्डल की कार्बनडाई ऑक्साइड और जल-वाष्प को लेकर सूर्य के प्रकाश उपस्थिति में साथ में हरे रंजक (क्लोरोफ़िल) की सहायता से इस क्रिया को पूर्ण करते है।

इसी प्रकाश-संश्लेषण के दौरान ग्लूकोज़ के साथ ऑक्सीजन बनती है, जिसे वायुमंडल में वापस छोड़ दिया जाता है.यानी अगर पौधा या पेड़ हरा न हो और प्रकाश न हो, तो प्रकाश-संश्लेषण नही होगा और न ही कोई पेड़ ऑक्सीजन छोड़ेगा… समझ मे आया। वो बस कार्बनडाइ ऑक्साइड ही छोड़ेगा। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में पेड़ एक और कार्य करते है वो है अपना भोजन बनाना यानी ग्लूकोज़ का बनना और ऑक्सीजन का उत्सर्जन क्योंकि वो ग्लूकोज के समय ही बनती है। जिसका पेड़ उपयोग नही कर सकता और वायुमंडल को वापिस कर देता है।आप जानते है कि रात में जब प्रकाश न के बराबर रहता है, तो प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सही तरह से होने से रही तब ऐसे समय पीपल और उस जैसे कई अन्य पेड़-पौधे कुछ और काम करते हैं, जिसे लोग ढंग से समझ नहीं पाए.आप एक बात जानते होंगे कि पीपल का पेड़ शुष्क वातावरण में पनपता है और इसके लिए उसके अंगों में पर्याप्त विशेषताएं हैं।
पेड़-पौधों की पत्तियों पर स्टोमेटा नामक नन्हे नन्हे छिद्र होते हैं जिनसे गैसों और जल-वाष्प का लेन-देन होता है. सूखे गर्म माहौल में पेड़ का पानी न निचुड़ जाए, इसलिए पीपल दिन में अपेक्षाकृत अपने स्टोमेटा बन्द करके रखता है.जिसके कारण पीपल दिन में पानी की कमी से लड़ पाता है.लेकिन इसका नुकसान यह है कि फिर दिन में प्रकाश-संश्लेषण के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड उसकी पत्तियों में कैसे प्रवेश करे क्योंकि दिन में स्टोमेटा तो बन्द हैं. तो फिर दिन में प्रकाश-संश्लेषण कैसे हो?

 इसके लिए पीपल व उसके जैसे कई पेड़-पौधे रात को अपने स्टोमेटा खोलते हैं और हवा से कार्बनडाई ऑक्साइड स्टोरेज करते हैं. और उससे मैलेट नामक एक रसायन बनाकर रख लेते हैं. ताकि फिर अगले दिन जब सूरज चमके और प्रकाश मिले, तो प्रकाश संश्लेषण में सीधे वायुमण्डलीय कार्बनडाई ऑक्साइड की जगह इस मैलेट का प्रयोग कर सकें.यानी पीपल का पेड़ रात को भी कार्बन डाई ऑक्साइड-शोषक है और ऐसा करने वाला वह अकेला पेड़ नहीं है। कई हैं उसके जैसे. ज़्यादातर रेगिस्तानी पौधे यही करते है जैसे अरीका पाम, नीम, स्नेक प्लांट, ऑर्किड, तुलसी और कई अन्य पेड़ पौधे रात को कार्बनडाई ऑक्साइड लेकर उसे मैलेट बनाकर आगे प्रकाश-संश्लेषण के लिए इस्तेमाल करते है

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