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“बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के सपनों का भारत” विषयक राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम

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विषयक राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम

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“बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के सपनों का भारत” विषयक राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम

काशी हिंदू विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना तथा पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के नालंदा महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर “बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के सपनों का भारत” विषयक राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम का ऑनलाइन आयोजन किया गया।

मुख्य वक्ता के रूप में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के नालंदा कॉलेज के शिक्षा विभाग के प्रोफेसर ध्रुव कुमार ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सभी महापुरुषों बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर अग्रणी नेता रहे है। संविधान निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को जन – जन तक पहुंचाने की जरुरत है । देश के बहुजनों के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले डॉ. आंबेडकर की विरासत से आने वाली पीढ़ी को बताये जाने की आवश्यकता है । बाबा साहेब आंबेडकर ऐसे भारत का सपना देखते थे, जहां जातीय आधार पर किसी तरह का कोई भेदभाव न हो। जहां आर्थिक और सामाजिक हर क्षेत्र में वंचित तबके को पूर्ण प्रतिनिधित्व मिले। वे सम्पूर्ण भारत राष्ट्र के राष्ट्रीय नेतृत्वकर्ता थे। वे वर्ग संघर्ष या साम्यवाद के कभी भी समर्थक नहीं रहे। उनका स्पष्ट दृष्टिकोण था कि धार्मिक, सामाजिक व आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त हुए बिना मात्र राजनीतिक स्वतंत्रता से देश उन्नति सर्वथा संभव नहीं है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अरुणोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विश्वनाथ शर्मा ने कहा कि वास्तव में बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर जी बहु आयामी प्रतिभा के धनी थे। वे एक महान समाज सुधारक, श्रेष्ठ शिक्षाविद, ओजस्वी वक्ता, उत्कृष्ट विचारक व भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत व्यक्ति थे। कई बार तो ऐसा लगता है कि उनके व्यक्तित्व को शब्दों में बांधना संभव नहीं है। वे तो सम्पूर्ण समाज को एकता के सूत्र में बांधने के पक्षधर थे। वे एक ऐसे समाज के पक्षधर थे जिसमें आपसी भेदभाव न हो। वे किसी जाति, मत या संप्रदाय के नेतृत्वकर्ता नहीं थे। बाबा साहिब के द्वारा निर्मित संविधान के कारण ही अपना देश उन्नति कर रहा है। बाबा साहब को सिर्फ संविधान निर्माता तक समेटना मुश्किल है।वे ऐसे इंसान थे, जिन्होंने सदियों से जाति और वर्ण व्यवस्था में फंसे भारत को इनसे परे सोचने को मजबूर किया औऱ इसी सोच के कारण डा. भीमराव आंबेडकर जी को भारत रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया ।

डॉ वेद प्रकाश रावत ने कहा कि बाबा साहेब केवल संविधान निर्माता ही नहीं अपितु किसानों, महिलाओं, सरकारी कर्मियों और यहां तक की निजी सेवाओं में लगे लोगों के हितैषी के रूप में महती कार्य के याद किये जायेंगे क्योंकि बाबा साहेब डा. भीमराव आंबेडकर जी का काम किसी सीमा में बंधा हुआ नहीं था। बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर द्वारा किया गए काम देश के हर व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाया है और उनको विशेष अधिकार दिलवाने का काम किया है।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम समन्वयक डॉ बाला लखेंद्र ने किया और विषय की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करने वालों में डॉ राघवेंद्र मिश्रा, श्री आनंद कुमार, मनीषा सिंह, श्री मनीष सरकार, शैलजा सिंह, तनीषा राज, शैलेंद्र कुमार आदि के नाम प्रमुख हैं । धन्यवाद ज्ञापन डॉ पंकज बोरा ने किया।

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