अयोध्यालाइव

Wednesday, May 25, 2022

व्याधियां क्यों और कैसे बनाती है, आपके शरीर में घर जानिए : आचार्य डॉक्टर आर पी पांडे वैद्य जी

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest

Listen

अयोध्या । किसी भी चिकित्सा को करने के पूर्व विमारीयों के कारणों को जानना वेहद जरूरी होता है । चिकित्सा से श्रेष्ठ है कारण को जानना । आजकल नगरों शहरों में डॉक्टरों की लंबी कतारें हैं , अनगिनत हॉस्पिटल हैं , सोसल मीडिया पर भी सैकड़ो लेख हैं लेकिन क्या उनसे रोगी स्वस्थ हो रहे हैं ..?
विमारियों के प्रकार : – विमारियां दो प्रकार की होती है । जबकि आयुर्वेद दृष्टिकोण से रोगियों को तीन श्रेणी में रखा गया है । जैसे –
(1) साध्य रोग :- जो रोग होते ही हमें पता चलती है और परहेज़ ओर सावधानी से जल्दी ठीक भी हो जाती हे
(2) कष्ट साध्य रोग :- वह होती है जो सह सह के ठीक करनी पड़ती बहुत यत्न करना पड़ता है ।
(3) असाध्य रोग :- जो कुछ भी कर लो ठीक ही नहीं होती अंत में प्राण चले जाते है ।
जानिए क्या और कोनसी बीमारियां है ये सब

  1. साध्य या इलाज योग्य रोग – जिन विमारियों पर अब तक शोध हो चुका है उन विमारीयों का इलाज संभव है । जिन वीमारीयों की उत्पत्ति जीवाणु , वैक्टीरिया , पैथोजन , वायरस , फंगस द्वारा होती है जैसे – टी बी , टायफाइड , टिटनेस , मलेरिया , न्यूमोनिया आदि । इन विमारीयों के कारणों का पता लगने के कारण इनकी दवाएं विकसित की जा चुकी हैं इसलिए इनका इलाज स्थायी रूप से संभव है ।
  2. असाध्य विमारियां – इन विमारियों की उत्पत्ति किसी जीवाणु , बैक्टीरिया , पैथोजन , फंगस , वॉयरस आदि से नहीं होती इसलिए इनके कारणों का पता नहीं लग पाया है । जब इनके कारणों का ज्ञात नहीं हुआ तो इनकी दवायें भी विकसित नहीं हो पायी हैं । जैसे – अम्लपित्त ( Stomach Acidity ) , दमा ( Asthama ), गठिया , जोड़ों का दर्द (Arthritis ) , कर्क रोग ( Cancer ) , कब्ज , मधुमेह , बबासीर , भगन्दर , रक्तार्श ( Piles , Fistula ), आधाशीशी ( Migrain ), सिर -दर्द , प्रोस्टेट आदि ।
    इसे अनेक विमारियां है जिस दिन शुरू हो गयी मरने तक दवा खाते रहो तब भी ठीक नहीं होगी , कारण कोई जीवाणु व वायरस नहीं मिला जिससे दवा बन सके । इसीलिए यह आसध्य विमारियां (Chronic , Long term , Incurable Diseases ) की संज्ञा दी गयी । जिनमे प्रमुख हैं
  3. पेट की अम्लता – पाचन तंत्र की अम्लता पाचन तंत्र में किसी खास विकार के कारण के कारण उत्पन्न होता है । आधुनिक विज्ञान में इसको दूर करने के लिए क्षारीय गोलियां दी जाती है । यह गोलियां जाकर पेट में अम्ल को खत्म करता है, और हम सोचते हैं हम ठीक हो गए । इसे एक वैज्ञानिक Le Chatilier’s के एक सिद्धांत से समझा जा सकता है । In a system at equilibrium , if a constraint is brought, the equilibrium shift to a direction so as to annal the effect. यानि जैसे -जैसे आप किसी दवाई द्वारा पेट की एसिडिटी मिटायेंगे वैसे – वैसे पेट एसिड बनाता जायेगा और वीमारी को दीर्घकालिक असाध्य रूप में बदलकर अल्सर का रूप ले लेगी
  4. दमा / उच्च रक्तचाप : – ब्लडप्रेशर हो जाने पर इसमें जो भी दवायें दी जाती है उससे रक्तवाहनियां लचीली हो जाये या उनका व्यास बढ़ जाये । जैसे व्यास बढेगा वहाँ दूसरा सिद्धांत लागू हो जायेगा इससे रक्त का दबाव तो कम हो जायेगा क्योंकि फ्लो बढ़ गया , लेकिन इस दवा से रक्तवाहनियां जो की लचीली प्रवर्ति होती हैं वह फिर उसी अवस्था में आ जाती है लिहाजा फिर गोली लो , फिर धमनियां फैलाओ इस प्रकार यह क्रम दीर्घकालिक रोग रूप ले लेता है ।
    3 हृदय रक्त वाहनियों के अवरोध ( Coronary Artery Blockin ) : – ऐसा होने पर डॉक्टर बलून एंजियोप्लास्टी करते हैं जिसमें जिस जगह ब्लॉक रहता है उस जगह स्टेंट डालकर रक्त के परिसंचरण के लिए खोला जाता है , अब रक्त उस स्टेंट यानि स्प्रिंग के भीतर से जाना शुरू करता है । यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि उस ब्लॉक को दूर करने के लिए कोई भी उपचार नही किया जाता है । लिहाजा 22% लोगों के रक्त नलिकाओं में फिर से ब्लॉक आ जाता है । जो कि Wound Healing व Foreign Body के कारण होता है । जब स्प्रिंग के आगे -पीछे पुनः ब्लॉक बन गए तो डॉक्टर के पास बायपास के अलावा कोई उपचार नहीं बचता है , लेकिन समस्या का स्थाई समाधान नहीं मिलता है
  5. बबासीर / मूल व्याधि ( Piles ) :- यहां पर भी गुदा द्वार के बाहर आये हुए मस्सों को शल्य क्रिया द्वारा काट दिया जाता है जबकि गुदाद्वार के अंदर स्थति रक्तवाहनी के नर्व का कोई भी इलाज नहीं किया जाता जिससे यह समस्या पुनः आ जाती है
    5 गठिया / जोड़ों का दर्द ( Arthritis ) :- आधुनिक विज्ञान के पास इस वीमारी के लिये या तो पेन किलर है या फिर पें किलर काम करना बंद कर दे तो डॉक्टर स्टेराइड देना शुरू कर देते हैं । स्टेराइड खुद 20 से 25 बीमारियों को जन्म देता है । ज्यादा घुटनो के दर्द में घुटना बदलकर कृतिम घुटना लगा दिया जाता है ।
    इस प्रकार आप देखेंगे कि आसध्य विमारियों के इलाज में उत्पन्न कारणों को नजर-अंदाज करके वीमारी को आसध्य बना दिया जाता है ।
    ऐसी स्थिति क्यों ..?
    जब जो शरीर भगवान ने मनुष्य को सतयुग में दिया था वही शरीर कलियुग में भी है वही श्वसन, वही रक्तपरिसंचरण, वही हँसना -रोना, मल-मूत्र विसर्जन उस समय भी था और आज के समय में भी है कहीं कोई अंतर नहीं है।
    हम जब भी कोई भी मशीन लेते हैं बिना उसका मैनुअल पढ़े उसको ऑपरेट नहीं करते फिर यह कैसी विडम्बना है कि मानव जैसी जटिल मशीन को जो अपने जैसे मशीन को जन्म देने की क्षमता रखती हो उसको बिना किसी ऑपरेटिंग मैनुअल ( गीता, आयुर्वेद ) पढ़े चलाते हैं ।
    ध्यान रहे किसी कुत्ते को, गाय को, बंदर को या अपने शिशु को कोई हानिकारक चीज खिलाइये वह तुरंत थूक देता है, या जबरदस्ती से खिलाया तो उल्टी कर देगा या फिर चमड़ी रोग, फोड़ा – फुंसी, मल -मूत्र , पसीने के रास्ते बाहर आ जायेगा। लेकिन जैसे – जैसे हम बड़े हो रहे हैं अपनी जीभ के सुख के लिये नित्य-प्रति हानिकारक पदार्थ को ग्रहण करते हुये प्रकृति के नियमो की उपेक्षा करते हुए दीर्घकालिक असाध्य विमारीयों के चक्रव्यूह में स्वतः फंसते जा रहे हैं
ADVERTISEMENT
Advertisements

Related News

Leave a Reply

JOIN TELEGRAM AYODHYALIVE

CYCLE STUNT IN RAM KI PAIDI AYODHYA

Currently Playing
Coming Soon
देश का सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री कौन रहा है?
देश का सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री कौन रहा है?
देश का सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री कौन रहा है?

Our Visitor

113446
Users Today : 153
Total Users : 113446
Views Today : 185
Total views : 145871
May 2022
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
Currently Playing
May 2022
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  

OUR SOCIAL MEDIA

Herbal Homoea Care

Also Read

%d bloggers like this: