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Wednesday, July 6, 2022

बीएचयू : किसानों के घर पर वर्टिकल फ़ार्मिंग के माध्यम से जैविक सब्जी उत्पादन के लिए किसान संगोस्टी

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बीएचयू : किसानों के घर पर वर्टिकल फ़ार्मिंग के माध्यम से जैविक सब्जी उत्पादन के लिए किसान संगोस्टी

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बीएचयू : किसानों के घर पर वर्टिकल फ़ार्मिंग के माध्यम से जैविक सब्जी उत्पादन के लिए किसान संगोस्टी

बीएचयू के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान में जैव उर्वरक और बायोडीकंपोजर पर शोध कार्य डॉ. जे. पी. वर्मा (सीनियर असिस्टं प्रोफेसर) की प्लांट माइक्रोब प्लांट माइक्रोब इंटरेक्शन लैब में चल रहा है, और कई तरह के उन्नतशील जैव उर्वरक और बायोडीकंपोजर तैयार किया गया है; इस जैव उर्वरक और बायोडीकंपोजर को किसानो तक पहुचने तथा उनको प्रयोग वर्टिकल फ़ार्मिंग करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली की तरफ से परियोजना “वाराणसी जिले के अनुसूचित जाति के किसानों के घर पर खड़ी खेती के माध्यम से जैविक सब्जी उत्पादन के लिए कम लागत वाली तकनीक का विकास” प्रमुख अन्वेषक डॉ. जे. पी. वर्मा के अगुवायी में चलायी जा रही है।

बीएचयू : किसानों के घर पर वर्टिकल फ़ार्मिंग के माध्यम से जैविक सब्जी उत्पादन के लिए किसान संगोस्टी
बीएचयू : किसानों के घर पर वर्टिकल फ़ार्मिंग के माध्यम से जैविक सब्जी उत्पादन के लिए किसान संगोस्टी

इस परियोजना के तहत किसान संगोस्टी का आयोजन को भीती (भागेली टोला) रामनगर वाराणसी के अनुसूचित जाति के किसानों को वर्तिकल फ़ार्मिंग (खड़ी खेती), जैव उर्वरक, काम्पोस्ट खाद इत्यादि विषयों पर किसानों को बतया गया और इसमें 70 -100 किसान उपस्थित थे। किसानों को जैविक उर्वरक और पालक, लौकी, कोंहड़ा, धनिया, चौराई का बीज इत्यादि इस किसान संगोस्टी में वितरण किया गया जो की किसान अपने किचन गॉर्डन में उगा सके।

इस संगोस्टी में परियोजना के संचालक, डॉ. जे. पी. वर्मा और शोध छात्र अर्पन मुखर्जी, आनंद कुमार गौरव, दीपक कुमार ने किसानो को जैविक खाद, काम्पोस्ट खाद के उपयोग करने से होने वाले लाभ और अधिक रासायनिक खादों से खेतो में उपयोग करने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं, के बिस्तर में जानकारी दी और समय-समय पर मिटटी की जाँच कराने की सलाह दी और वर्तिकल फ़ार्मिंग (खड़ी खेती) में पोधों को बहु सतही ढांचा में उगाया जाता है।

इसमें बीज का उपचार करते हैं, वही पौधे की जड़ो, कंद और मिटटी का भी उपचार करते हैं। यह सब उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ अनाज के दाने सुडौल, स्वस्थ, खनिज तत्व अधिक व खाने के स्वाद में वृद्धि होती है। इन सबका प्रयोग करने से न केवल किसान बल्कि उसका पूरा परिवार स्वस्थ रहता हैA इसके साथ ही मिटटी की जो उपजाऊ शक्ति, रासायनिक खाद, और कीटनाशकों से प्रभावित हो कर कम हो रही है वह जैविक खाद के के प्रयोग से बढ़ने लगती है।

जैविक उर्वरक के प्रयोग से 50% तक रसायनिक खाद को बचा सकते हैं। रसायनिक खादों तथा कितनाशकों से उत्पादित अन्न के प्रयोग से आदमी में भिभिन्न प्रकार की बीमारिया जैसे – पेट व सिर दर्द, अल्सर, कैंसर, हार्ट अटैक, लकवा, नपुंसकता, हड्डिया को कमजोर होना आदि हो रही हैA जैविक उर्वरक का प्रयोग उसे पूरी तरह से स्वस्थ बनता है।

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