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Friday, December 9, 2022

चिकित्सा विज्ञान संस्थान का एक ही स्थान पर प्राचीन व आधुनिक चिकित्सा व शिक्षा का मॉडल अनुकरणीयः डॉ. जितेन्द्र सिंह

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चिकित्सा विज्ञान संस्थान का एक ही स्थान पर प्राचीन व आधुनिक चिकित्सा व शिक्षा का मॉडल अनुकरणीयः डॉ. जितेन्द्र सिंह

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चिकित्सा विज्ञान संस्थान का एक ही स्थान पर प्राचीन व आधुनिक चिकित्सा व शिक्षा का मॉडल अनुकरणीयः डॉ. जितेन्द्र सिंह

· आईएमएस-बीएचयू के वार्षिकोत्सव को केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने किया संबोधित

वाराणसी : चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, अपना 62वां वार्षिकोत्सव मनाया, जिसके मुख्य अतिथि माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, कार्मिक एवं लोक शिकायत मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार, डॉ. जितेन्द्र सिंह रहे। विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जी.एन.एस. विश्वविद्यालय, सासाराम, बिहार, के कुलपति प्रो. एम.के. सिंह, भारतीय दंत चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष, प्रो. डी. मजूमदार, तथा उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.के. जोशी विशिष्ट अतिथि थे। कुलगुरु, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, प्रो. वी.के. शुक्ला, कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस. के. सिंह ने स्वागत संबोधन देते हुए कहा कि भारतवर्ष में यह मात्र ऐसा संस्थान हैं, जहां एक ही प्रांगण में आधुनिक चिकित्सा संकाय, आयुर्वेद संकाय, दन्त चिकित्सा संकाय एवं नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहा है। संस्थान की उपलब्धियों व वार्षिक प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए प्रो. सिंह ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान संस्थान अपने उत्कृष्ट शिक्षण, अनुसंधान व चिकित्सा सुविधाओं के लिए ख्याति व प्रतिष्ठा के नित नए पायदान चढ़ रहा है। एनआईआऱएफ रैंकिंग तथा अन्य रैंकिंग में संस्थान का साल दर साल बेहतर इस बात की पुष्टि करता है। उन्होंने कोविड 19 महामारी के दौरान संस्थान तथा यहां के चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों व अन्य स्टाफ के उल्लेखनीय योगदान की सराहना करते हुए, मरीजों को दी गई सुबिधाओ का आंकड़ा भी प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, कार्मिक एवं लोक शिकायत मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार, डॉ. जितेन्द्र सिंह कहा कि यह महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की दूरदर्शिता थी, आज से एक शताब्दी से भी अधिक समय पूर्व उन्होंने ऐसे संस्थान की परिकल्पना की जहां, विविध विषयों की शिक्षा उपलब्ध हो। आज नए संस्थानों की शुरुआत में महामना की उस सोच की झलक दिखती है, क्योंकि नए संस्थानों की में अनेक विषयों की शिक्षा एक स्थान पर मिलने के विचार के साथ काम किया जा रहा है। उन्होनें कहा कि जिस प्रकार की शिक्षा व चिकित्सा सुविधाएं चिकित्सा विज्ञान संस्थान में हैं, पूरे देश में उसी तरह की व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ताकि एक ही स्थान पर आधुनिक चिकित्सा व आयुर्वेद व प्राचीन चिकित्सा प्रणाली का लाभ लोगों को मिल सके। उन्होंने कहा कि आज अपने भविष्य को लेकर विद्यार्थी काफी सचेत व जागरूक हो गए हैं और वे जानते हैं कि उन्हें शिक्षा के लिए कहां जाना है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी से पहले नॉन कम्युनिकेबल बिमारीयों के प्रबंधन पर ही ज्यादा ध्यान दिया जाता था, लेकिन महामारी के दौरान यह सोच बदली है। अब कम्युनिकेबल बीमारियों पर भी बहुत काम हो रहा है। साथ ही साथ डाक्टरों ने भी प्राचीन और आधुनिक पद्धति का प्रयोग करते हुए इस संबंध में चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कार्य किया। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन चिकित्सा व्यवस्था आज अभूतपूर्व सुधार व विकास देखने को मिल रहा है।

जी एन एस विश्वविद्यालय, सासाराम, बिहार, के कुलपति प्रो. एम के सिंह ने बताया कि समाज में बीएचयू का मुख्य चेहरा चिकित्सा विज्ञान संस्थान है और इसने अपनी गरिमा बनाए रखी है। उन्होंने भरोसा जताया हि संस्थान के विद्यार्थी एवं शिक्षक आईएमएस की प्रतिष्ठा में नए प्रतिमान स्थापित करेगें।

डेन्टल काउन्सिल आफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ डी मजूमदार अध्यक्ष ने कहा कि संस्थान के पुराछात्र पूरे विश्व मे फैले हुए हैं। उन्होंने बताया कि बीडीएस का कोर्स अब 9 सेमेस्टर का हो जायेगा तथा अंतिम वर्ष की परीक्षा पूरे देश में एक समान होगी। उन्होंने बताया कि देश भर के राजकीय डेन्टल कालेजों में एमडीएस की सीटें बढ़ाने हेतु प्रयास किया जायेगा।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस के जोशी ने कहा कि हमें चिकित्सा में कुशल इन्टीग्रेशन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वे इस बारे देश भर में चिकित्सा में इंटिग्रेशन के संबंध में सुझाव देते रहते हैं। बीएचयू के बारे में प्रो. जोशी ने कहा कि इस वे यहीं के विद्यार्थी रहे हैं और जो भी हासिल किया है इसी संस्थान की बदौलत हासिल किया है।

कुलगुरू प्रोफेसर वी. के. शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान संस्थान वर्ष 1960 से चिकित्सा के लिए समर्पित है। पिछले दस वर्षों में गुणवत्तापरक शोध पर संस्थान का काफी ज़ोर रहा है और इसके शानदार नतीजे भी देखने को मिले हैं। कोविड19 महामारी के दौरान संस्थान ने जिस प्रकार का उल्लेखनीय कार्य किया है वह शोध व अनुसंधान में संस्थान की प्रगति व उपलब्धियों को परिलक्षित करता है।

वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट शोध हेतु 42 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। (सूची संलग्न) इस अवसर पर 275 छात्र एवं छात्राओं को विश्वविद्यालय में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर पुरस्कृत भी किया गया। साथ ही साथ संस्थान से सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों, चिकित्सकों, शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक अधिकारियों व कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के संयोजक प्रो. संजीव कुमार गुप्ता, सह संयोजक प्रो. टी पी चतुर्वेदी, आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. के एन द्विवेदी एवं दन्त संकाय प्रमुख प्रो. विनय श्रीवास्तव, डीन रिसर्च प्रो. अशोक चौधरी एवं सर सुंदरलाल चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. के. के. गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। मंच संचालन प्रो. शोभा भट्ट एवं डॉ. किरन गिरी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संजीव कुमार गुप्ता ने प्रेषित किया।

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