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बायोएक्टिव व बायोकंट्रोल में एंडोफाइट्स वरदानः प्रो0 आरएन खरवार

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बायोएक्टिव व बायोकंट्रोल में एंडोफाइट्स वरदानः प्रो0 आरएन खरवार

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बायोएक्टिव व बायोकंट्रोल में एंडोफाइट्स वरदानः प्रो0 आरएन खरवार

कोशिका संवर्धन में ऑक्सीजन वृद्धि आवश्यकः प्रो0 राजेश कुमार

अवध विश्वविद्यालय में सात दिवसीय कार्यशाला के चैथे दिन विद्यार्थी हुए प्रशिक्षित

अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग, भौतिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की “स्तुति” योजना के अन्तर्गत संचालित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के चैथे दिन गुरूवार को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो0 आरएन खरवार ने एंडोफिटिक कवक का मानव स्वास्थ्य में उनके कार्यात्मक पहलुओं चर्चा करते हुए कहा कि एंडोफाइट्स हमारे समाज में कई अंतः क्रियाओं से संबंधित है जो कृषि, पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य जैसे विषयों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

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उन्होंने विद्यार्थियों को एंडोफाइट्स की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी देते हुए रोगजनक से जुड़े आणविक पैटर्न से अवगत कराया। प्रो0 खरवार ने एंडोफाइट्स आधारित नैनोकणों के उभरते उपयोग पर बताया कि भविष्य में दवा के निर्माण में क्रांति ला सकते हैं। उन्होंने बताया कि नवोन्मेषी जैव-प्रौद्योगिकी उपकरणों के अनुप्रयोग से प्लांट-एंडोफाइट इंटरैक्शन की समझ को मजबूत किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त नए बायोएक्टिव का उत्पादन व बायोकंट्रोल में सुधार करने में एंडोफाइट्स एक वरदान साबित हो सकता हैं। इसके अतिरिक्त पौधों, पर्यावरण और मनुष्यों के स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव डाल सकते हैं।

प्रशिक्षण कार्यशाला के द्वितीय सत्र में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनुपर के प्रो0 राजेश कुमार ने जैव प्रौद्योगिकी प्रक्रिया के प्रारंभिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कोशिका संवर्धन में ऑक्सीजन वृद्धि आवश्यक है। कोशिकाएं ऑक्सीजन गैर-यौगिक रूपों में प्राप्त करती हैं, जिसे घुलित ऑक्सीजन (डीओ) कहा जाता है।

इसकी क्षमता को बढ़ाने के लिए किण्वन तकनीकी का प्रयोग किया जाता है, जो सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक वातन (एरिएशन) नामक प्रक्रिया से कोशिकाओं को लगातार घुलित ऑक्सीजन प्रदान करता है। कार्यक्रम के दौरान प्रो0 राजेश ने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी को केवल रिकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीकी से ही जोड़कर न देखा जाए बल्कि इसका सम्बन्ध प्राचीन मानव सभ्यता के साथ लगातार विकास से है।

इस प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रो0 शैलेन्द्र कुमार, प्रो0 राजीव गौण़, डॉ0 अनिल कुमार, डॉ0 नीलम यादव, डॉ0 सत्य प्रकाश सिंह, डॉ0 अजय कुमार, अंकुर श्रीवास्तव अन्य शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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