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UPSC Exam 2021 में 16वीं रैंक हासिल करने वाली डॉ. अंशु प्रिया ने बताए सफलता के राज

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16वीं रैंक हासिल करने वाली डॉ. अंशु प्रिया ने बताए सफलता के राज

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UPSC Exam 2021 में 16वीं रैंक हासिल करने वाली डॉ. अंशु प्रिया ने बताए सफलता के राज

उसके अलावा न्यूजपेपर द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस  भी मैं पढ़ा करती थी

सोमवार को जारी किए गए यूपीएससी रिजल्ट में 16वां स्थान प्राप्त करने वाली मुंगेर की बेटी डॉक्टर अंशु प्रिया शिक्षक पिता की पुत्री हैं. मुंगेर जिले के पूरब सराय में गायत्री नगर के रहने वाले सरकारी शिक्षक शैलेंद्र कुमार शैलेंद्र को जैसे ही इस सफलता की जानकारी मिली पूरे परिवार में खुशियां मनाई जाने लगीं. खबर के सुनते ही बधाई देने वालों का तांता लग गया. सब यही कह रहे थे कि मास्टर साहब की बिटिया ने तो कमाल कर दिया! यादव जी की पोती ने तो सिर ऊंचा कर दिया! वर्तमान में अंशु प्रिया दिल्ली के एम्स में डॉक्टर हैं.

बिहार के मुंगेर जिला की छात्रा अंशु प्रिया ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में 16वां स्थान हासिल किया है। यूपीएससी ने सोमवार को सिविल सेवा अंतिम परिणाम 2021 घोषित किया। मुख्यमंत्री नीतीष कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा 2021 में सफल अभ्यर्थियों को बधाई एवं शुभकामनायें दी है तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा में पहले तीन स्थानों पर लड़कियां रहीं हैं। उन्होंने शीर्ष तीन स्थान पाने वाली श्रुति शर्मा, अंकिता अग्रवाल एवं गामिनी सिंगला को विशेष रूप से बधाई देते हुये कहा कि यह बेहद खुशी की बात है। देश की बेटियों की यह सफलता आधी आबादी को प्रेरणा देगा।

बिहार सरकार के महिला एवं बाल विकास निगम द्वारा सोमवार को जारी एक बयान के अनुसार बिहार सरकार की मुख्यमंत्री सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत नकद प्रोत्साहन प्राप्त करने वाले कुल पांच उम्मीदवारों (महिला) में अंशु प्रिया भी थीं। यह राज्य के लिए गर्व की बात है।

अंशु प्रिया के पिता शैलेंद्र कुमार शैलेंद्र और दादा सरकारी शिक्षक हैं. स्वर्गीय हो चुकीं दादी भी शिक्षक थीं. वर्तमान में अंशु के पिता संदलपुर कन्या मध्य विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं. मां इंदु कुमारी ने इतिहास में स्नातकोत्तर किया है और वह हाउस वाइफ हैं.शिक्षक परिवार में जन्मीं डॉ अंशु प्रिया की आरंभिक पढ़ाई मुंगेर के नोट्रेडम स्कूल से हुई.

वर्ष 2013 में एमबीबीएस परीक्षा पास करने के बाद वर्ष 2018 में पटना एम्स से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर दिल्ली एम्स में कार्य कर रही है. परिवार अंशु प्रिया के सफलता पर खुश है. सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत पिता शैलेंद्र कुमार शैलेंद्र कहा कि मुझे दो संतान है. बड़ी बेटी अंशु प्रिया एवं बेटा प्रांशु राज. आज मेरी बेटी ने पूरे जिला ही नहीं राज्य का नाम रौशन किया है. हम लोगों को अपनी बेटी पर गर्व है.

Ques: कितना कॉन्फिडेंस (confident) थीं आप अपनी रैंक (rank) को लेकर?

Ans : मैं तो कॉन्फिडेंट (confident) थी क्योंकि मेरे पेपर (paper) अच्छे गए थे और मेरा इंटरव्यू (interview) भी अच्छा हुआ था, तो मैंने सोचा था कि मुझे टॉप 100 में जगह मिलेगी (I will get somewhere top 100), लेकिन ये जो 20वी रैंक के अंदर आई है, तो मुझे लगता है ये थोड़ा विश्वास करना मुश्किल है।

Ques : आप एक डॉक्टर (Doctor) भी हैं और हमने देखा है कि कोविड-19 के समय डॉक्टरों को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, आपने उस टाइम (time) अपनी पढ़ाई और इस चीज को कैसे मैनेज (manage) किया?

Ans : जब कोविडकी सेकंड और थर्ड वेव  आई थी, तो मैं बिहार डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी  के साथ कोविड-19 रोकथाम के प्रचार प्रसार में और लोगों को अवेयर  करने के काम से जुड़ी हुई थी‌। उस समय थोड़ा तैयारी करना मुश्किल था क्योंकि वह एक ऐसा समय है, जब आप मानव सेवा के बारे में और अपने आसपास के लोगों के बारे में, मरीजों के बारे में ज्यादा सोचते हैं। मुझे लगता है  कि तब मैंने ध्यान अपने मरीजों पर ही दिया था। सेकंड, थर्ड वेव के बाद थोड़ा समय मिला, तब मैंने अच्छे से इस एग्जाम  की तैयारी की।

Ques: आपको क्या लगता आईएएस (IAS) को लेकर लोगों में इतना क्रेज ( Craze) क्यों है?

Ans :मुझे लगता है, आईएएस या कोई भी सिविल सर्विसेस  है, उससे ग्राउंड लेवल (ground level) पर बदलाव लाने की पोटेंशियल बहुत इंपॉर्टेंट है। हमारी सरकार इतनी योजनाएं बनाती है, पर उसे ग्राउंड  लेवल पर कैसे इंप्लीमेंट  करना है, ये ब्यूरोक्रेसी का काम होता है, तो मुझे लगता है कि यही एक बहुत बड़ा क्रेज है युवाओं के बीच में और उसके साथ-साथ आपके पास पावर टू चेंज  आती है। आपके पास जितना ज्यादा पावरआएगी, उतनी ज्यादा रिस्पांसिबिलिटीआती है। इसलिए यह ऐसी जॉब  है, जहां आपके पास बहुत ज्यादा रिस्पांसिबिलिटी है, ग्राउंड  लेवल पर बदलाव करने का पोटेंशियल है। मुझे लगता है कि यही वजह हैं, जो सिविल सर्विस के प्रति लोगों को आकर्षित करती हैं

Ques: आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगी?

Ans :मैं इस सफलता का श्रेय पहले तो ईश्वर को देना चाहूंगी और उसके अलावा अपने माता-पिता, अपने परिवार के लोग और अपने मित्रों को जो मेरे साथ पूरे समय इस जर्नी (journey) में रहे।

Ques: अपने बचपन के दिनों के बारे में बताइए?

Ans :मेरी जो आरंभिक शिक्षा है, वह नोट्रे डेम एकेडमी (Notredom academy) मुंगेर से हुई है।
10वीं के बाद 12वीं में एडमिशन दरभंगा में लिया क्योंकि मेरा स्कूल 10 तक ही था। फिर मैंने मेडिकल (medical) एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी शुरू की, उस समय एम्स एंट्रेंस एग्जाम  अलग हुआ करता था। एम्स (AIIMS) में जो रैंक आई मेरी, उसके हिसाब से मैंने एम्स (AIIMS) पटना को चुना क्योंकि मैं बिहार से हूं और मेरा घर भी है। उसके बाद मैंने 2019 के जनवरी में एमबीबीएस डिग्री प्राप्त की। फिर मैंने एम्स पटना में और बाकी जगहों पर भी डॉक्टर के रूप में काम किया। तभी मुझे लगा कि यह सही समय है सिविल सेवा की तैयारी का और मैंने सिविल सर्विसेज  की तैयारी शुरू की।

Ques : क्या रिएक्शन (reaction) था सबसे पहले फैमिली का? आपके पापा एक स्कूल टीचर रहे हैं उनकी स्ट्रिक्टनेस (strictness) आपके लिए कितना हेल्पफुल (helpful) रहा?

Ans : मेरे भाई ने सबसे पहले रिजल्ट देखा और मेरा भाई काफी खुश था। जब उसने ही बताया  कि ऐसी रैंक ) आई है आपकी, तो मुझे भी बहुत खुशी हुई और सबसे पहले अपनी मम्मी-पापा को फोन  लगाया, दोनों ही रोने लगे, उनके लिए काफी बड़ी उपलब्धि थी। ये तो रिएक्शन की बात है और स्ट्रिक्टनेस  के बारे में तो मेरे पापा एक शिक्षक जरूर हैं पर वो कभी इतने स्ट्रिक्ट  नहीं थे कि हमेशा पढ़ाई करनी है। उन्होंने हमेशा मेरे हर डिसीजन को सपोर्ट किया। जब मैंने यह बताया कि अब मुझे अपने मेडिकल की पढ़ाई है, उसे शिफ्ट  करना है क्योंकि एक डॉक्टर के नाते हमारे लिए एक बड़ा बदलाव होता है, हमारा कोई बैकग्राउंड  नहीं होता ह्यूमैनिटीज (Humanities) के सब्जेक्ट्स (Subjects) में, जो इस एग्जाम का क्रक्स (crux) है, तो ये काफी कुछ चेंज (change) करना था, काफी कुछ पढ़ना था, लेकिन उनका सपोर्ट और पूरे परिवार का सपोर्ट (support) हमेशा रहा।

Ques : वो कौन सा मोमेंट (moment) था, जब आपको लगा कि मुझे आईएएस (IAS) बनना है, देश की सेवा करनी है?

Ans : मुझे याद है कि मैं थर्ड ईयर एमबीबीएस (MBBS) में थी और हमारे यहां काफी सारे जो ज्वाइंट सेक्रेटरी (joint secretary) लेवल के ऑनरेबल (honourable) डायरेक्टर्स (directors) हैं, उनका आना होता था, पीएमएसएसवाई (PMSSY) के तहत जो नए एम्स (AIIMS) की स्थापना हुई है, उसके क्रियान्वयन को देखने के लिए। उससे मुझे काफी इंस्पिरेशन (inspiration) मिली कि जो एडमिनिस्ट्रेशन (administration) हैं या जो गवर्नेंस (governance) हैं, उसमें ग्राउंड (ground) लेवल पर चेंज (change) करने की कितनी आवश्यकता है और उसमें कितना कुछ आप बदलाव भी कर सकते हैं। दूसरा जो मेरा अनुभव था, जब मैं अपने कम्युनिटी मेडिसिन (Community medicine) की पोस्टिंग (posting) में एक विलेज (village) में गई थी, तो वहां पर एक महिला थी, वो 30 के आसपास की रही होंगी और उनको ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) था। उन्हें बहुत लास्ट स्टेज (last stage) का ही कैंसर (cancer) था, पर उन्हें पता भी नहीं था। वो सोचती थी कि कुछ और ही है और ठीक हो जाएगा। तो मैंने देखा-पूछा तो पता चला कि उनको नहीं पता कि ऐसा भी कुछ प्रेजेंटेशन होता है फिर बाद में ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) से डायग्नोज (Diagnose) किया गया। तब उस समय मुझे यह पता चला कि हम लोग केवल मरीज को देख रहे हैं, हम पेशेंट्स को केवल क्योर (cure) कर रहे हैं। हम उस ग्रास लेवल पर नहीं जाते हैं कि हेल्थ का एक प्रीवेंटिव एस्पेक्ट (preventive aspect) है, अवेयरनेस एस्पेक्ट (awareness aspect) है और जो स्वास्थ्य है वह आपके सैनिटेशन (sanitation) से स्वच्छता से, क्लीनलीनेस (cleanliness) से, हर चीज से लिंकड (linked) है। ये दो चीजें मेरा प्राइमरी मोटिवेशन (primary motivation) थी, लेकिन उसके अलावा मैं एक और चीज बोलूंगी की यूपीएससी (UPSC) की जो परीक्षा है, यह आपके पर्सनैलिटी (Personality) को बहुत डेवलप (develop) करती है। इसमें आप अपनी हिस्ट्री (history) अपनी ज्योग्राफी (geography) अपनी पोलाइटी (polity), अपनी इकोनॉमी (economy) सब के बारे में इतना कुछ जानने को मिलता है। ये एक बहुत बड़ा शानदार अनुभव है। ये सारे कारणों के कारण मैंने इस परीक्षा को दिया और मैंने इस जर्नी को बहुत इंजॉय किया है, तो उसके लिए मैं हमेशा धन्यवाद व्यक्त करती हूं।

Ques : आप अपनी स्ट्रेटजी (strategy) के बारे में बताइए?

Ans : इस परीक्षा के तीन स्टेज हैं और मुझे लगता है कि तीनों स्टेज (stage) काफी इंटीग्रेटेड (integrated) हैं। इस पूरी तैयारी में सबसे पहला स्तंभ है कि यूपीएससी (UPSC) के पास्ट इयर्स (Past years) के प्रश्न पत्र (question papers) और जो दूसरा स्तंभ है कि अपने सिलेबस (syllabus) को कितनी गहराई से स्टडी (study) किया है। प्रीलिम्स (prelims) का सिलेबस (syllabus) नहीं है, परंतु मेंस (mains) का डिटेल (detailed) सिलेबस (syllabus) है। इन दो चीजों को मैंने एनालाइज (analyse) किया। सभी सफल अभ्यर्थी इस चीज को जरूर करते होंगे। एक बार आपने एनालाइज (Analyse) कर लिया, आपको यह पता चल गया कि एक्चुअली एग्जाम (Actually exam) किस चीज के बारे में है क्योंकि सिलेबस (syllabus) इतना बड़ा है।
अगर आपने बिना एनालाइज (Analyse) किए इस एग्जाम (exam) पर आए, तो ये एग्जाम जंगल के जैसा है, जहां आप खो जाएंगे। तो सर्वप्रथम मैंने सिलेबस (syllabus) को और पास्ट ईयर (past year) के प्रश्न पत्र (question papers) को एनालाइज (Analyse) किया और उसके बाद मैंने इसकी तैयारी शुरू की। सबसे पहले कुछ टाइम (time) आपको बेस (base) बनाने में लगेगा। कुछ लोगों का जो बैकग्राउंड (background) है, वो ऑलरेडी (already) होता है, लेकिन हमारे जैसे लोग हैं, जो स्ट्रीम चेंज (stream change) करके आते हैं, उनके लिए थोड़ा डिफिकल्ट (difficult) है क्योंकि हम 9-10 सालों से ऐसे किसी सब्जेक्ट (subject) के टच (touch) में नहीं होते। आप एक प्रॉपर (proper) अध्ययन कीजिए 6-7 महीने और उसके बाद प्रैक्टिस। इसलिए प्रीलिम्स (prelims) के लिए एमसीक्यू (MCQ) की प्रैक्टिस (practice) मेंस एग्जाम (mains exam) के लिए लिखने की प्रैक्टिस (practice) जरूरी है। मैं एक और चीज बोलूंगी कि लिखने का मतलब यह नहीं है कि सिर्फ आपको तेज लिखना है लिखने का मतलब यह भी है कि आपको तेज सोचना है। मुझे लगता है कि हर दिन अगर आप पास्ट ईयर (past year) के क्वेश्चन पेपर (question paper) उठाएं और स्क्रिबल (scribble) करें कि इस क्वेश्चन में मैंने क्या लिखती? क्या लिखता? तो धीरे-धीरे आपकी सोचने की शक्ति है वो बढ़ेगी।

उसके अलावा न्यूजपेपर द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस  भी मैं पढ़ा करती थी और मुझे लगता है कि दोनों न्यूज पेपर्स  काफी अच्छे हैं और भी नेशनललेवल के न्यूजपेपर हैं, तो उन्हें भी पढ़ सकते हैं। न्यूज पेपर करंट अफेयर्स  कवर करवाती हैं। एंसर राइटिंग  के लिए प्रैक्टिस आपको करनी है। सिलेबस और पास्ट ईयर क्वेश्चन पेपर्स  को आपको बेसिक  बनाना है, यही मेरी तैयारी की स्ट्रेटजी रही।

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Ques : आपका ऑप्शनल (optional) क्या था और सिलेबस (syllabus) के बदलाव को आपने कैसे मैनेज किया?

Ans : मेरा ऑप्शनल (optional) मेडिकल साइंस (medical science) था और मैं डॉक्टरी बैकग्राउंड (Doctory background) से आती हूं, तो मैंने इसी को अपना ऑप्शनल (optional) रखा। हालांकि ये कठिन ऑप्शनल (optional) है, इसमें नंबर स्कोर करना काफी मुश्किल सा होता है और यह एक्सक्लूसिव ऑप्शनल (exclusive optional) है। आपका कोई ओवरलैप नहीं है, अगर जीएस (GS) को देखा जाए तो, चूकि मेरा बैकग्राउंड (background) था, तो मैंने इसके साथ ही अपनी तैयारी की।

सिलेबस (syllabus) के बदलाव के बारे में आपने पूछा, तो 2013 के बाद बदलाव में एक ही ऑप्शनल (optional) रखना होता है और हर एक ऑप्शनल (optional) का अपना एक डिफाइंड सिलेबस (defined syllabus) है। ऑप्शनल (optional) को लेकर मुझे लगता है खासकर अपने ऑप्शनल (optional) को लेकर जो सिलेबस (syllabus) यूपीएससी (UPSC) ने दे रखा है, यूपीएससी उसी को स्टिक (Stick) करती है। तो सिलेबस (syllabus) के बाहर क्वेश्चंस (questions) नहीं आते हैं। ऑप्शनल (optional) में भी पास्ट ईयर (past year) क्वेश्चन पेपर्स (question papers) बहुत इंपॉर्टेंट (important) हैं। यदि आपने अपने ऑप्शनल (optional) के 10 साल के पेपर्स (papers) को अच्छे से कर लिया, खास करके ऐसे ऑप्शनल (optionals) जो कि स्टैटिक (static) हैं, इंजीनियरिंग, मेडिकल का कोई ऑप्शनल, तो ये सारे अगर आपने अच्छे से एक बार पीवाईक्यूस (PYQs) कर लिए और सिलेबस वाइज प्रिपरेशन तो यह बहुत ही फलदायी है।

Ques : अपने इंटरव्यू (interview) के कुछ रोचक सवाल या कुछ रोचक बातें जो आपसे पूछी गई हो बताइए?

Ans : एक रोचक सवाल मुझसे पूछा गया वह यह था कि जब आप इंटरव्यू (interview) में जाते हैं तो पहनने के लिए एक सर्जिकल मास्क (surgical mask) आपको मिलती है, तो वह पहन के ही इंटरव्यू (interview) देना था क्योंकि कोविड-19 का टाइम (time) चल रहा था। मुझे याद है, जो चेयरपर्सन (chairperson) थे हमारे उन्होंने मुझे कहा आपने इसे ऐसे ही क्यों पहना है आप इसे उलट कर पहनिए, तो मैंने बोला कि इसको सही से पहना है। उन्होंने फिर मुझसे पूछा कि ऐसे क्यों पहनते हैं उलट के क्यों नहीं पहन सकते? तो मैंने उनको कारण बताया कि ये 3 लेयर (layer) का मास्क (mask) होता है और तीनों लेयर के अलग-अलग यूसेज (uses) है आप उसे फ्लिप (flip) कर देंगे, तो मास्क अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पाएगा, तो चेयर पर्सन काफी खुश हो गए। इसके साथ ही मैंने मास्क को कान पर दो बार लपेट के पहना था, तो यह सीडीसी (CDC) का रिकमेंडेशन (Recommendation) है कि मास्क (mask) को सही से पहनने का। मुझे याद है कि बगल में एक जो मेंबर (member) थे, उन्होंने चेयरपर्सन (chairperson) को यह बताया इन्होंने मास्क को इतने अच्छे से पहना है कि मास्क (mask) नीचे नहीं आया। मुझे लगता है कि यह एक पॉइंट (point) था, जहां पर चेयरपर्सन (chairperson) को काफी अच्छा लगा। उसके अलावा जो क्वेश्चन (question) थे वो मेरे होमटाउन (Hometown) पर थे। मेरे बैकग्राउंड (Background) से थे। आयुर्वेद यानि आयुष मिनिस्ट्री (Ayush ministry) ने कोविड-19 में बहुत अच्छा काम किया है, तो उसको लेकर सवाल थे। ओवर ऑल (overall) एक बहुत ही अच्छा अनुभव था।

Ques : इस एग्जाम (exam) की तैयारी करने के लिए एक पर्याप्त समय कितना होना चाहिए?

Ans :एक साल पूरा एग्जाम (exam) का प्रोसेस (process) है, प्रीलिम्स, मेंस (prelims mains) और इंटरव्यू (interview) का। उसके पहले एक साल मिनिमम (minimum) लगेगा, तो 2 से ढाई साल तो आपको लगना ही है, लेकिन अगर बिल्कुल भी बैकग्राउंड (background) नहीं है और वह स्किल सेट्स (skill sets) नहीं है, जो इस एग्जाम (exam) में चाहिए, तो उसको डेवलप (develop) करने के लिए समय लग सकता है। वैसे समय तो लगता है यह टाइम टेकिंग प्रोसेस (time taking process) है। मुझे लगता है कि अगर धैर्य है, तो उसको भली-भांति कर पाएंगे।

Ques : एक सिविल सर्वेंट (civil servant) देश और समाज के लिए किस तरह से योगदान दे सकता है?

Ans : समाज में जो बदलाव है ग्राउंड लेवल (ground level) पर वो सिविल सर्विसेज (civil services) के जरिए बहुत हद तक पॉसिबल (possible) है। हमने इतनी सारी अच्छी योजनाएं बना रखी हैं, इसका जो क्रियान्वयन है बिल्कुल जमीनी स्तर पर वो आईएएस-आईपीएस (IAS-IPS) या बाकी जो अधिकारी हैं उन्हें करना होता है। मुझे लगता है कि आपका ग्राउंड (Ground) से लोगों से जनमानस से काफी अच्छा कनेक्ट (connect) है तो वो आप को बहुत मानते भी हैं। आप उसकी समस्याओं को सुनते हैं, उसका निवारण भी कर सकते हैं, तो एक जो आपको रिस्पेक्ट (Respect) मिलती है, उस रिस्पेक्ट (respect) के कारण आप काफी कुछ जमीनी स्तर पर चेंज (change) कर सकते हैं। मुझे याद है कि कई सारे सीनियर ने काफी अच्छा काम किया है, डॉ समित शर्मा सर ने राजस्थान में जेनेरिक मेडिसिन (generic medicine) को लेकर काफी अच्छा काम किया है। काफी इनीशिएटिव (initiatives) लेकर आप बहुत कुछ बदलाव ला सकते हैं।

Ques : क्या आईएएस (IAS) बनने के लिए बचपन का सपना होना जरूरी है?

Ans : मुझे लगता है कोई कभी भी बन सकता है। मुझे ऐसा लगता है कि बचपन का सपना होना बहुत अच्छी बात नहीं मानूंगी, उसका कारण यह है कई बार 9-10 साल के या आजकल हमने देखा है कि 11th के बच्चे सिविल सर्विसेज (Civil services) के बारे में सोचने लगते हैं। उससे क्या है कि आपके ओवरऑल (overall) व्यक्तित्व के विकास है वो कहीं ना कहीं बाधित होगा और इसका प्रभाव आपके इंटरव्यू (interview) के प्रभाव पर दिखेगा क्योंकि जो आपका इंटरव्यू (interview) होता है उसमें डैफ (DAF) होता है। उसमें अपने स्कूल से लेकर कॉलेज से लेकर अभी तक जो भी किया है, आपकी जो अचीवमेंट्स (Achievements) है, आपने जो खेल खेला है, आपने कुछ एनसीसी (NCC) में भाग लिया, तो सबका एक वेटेज (Weightage) है, उसे आपको लिखना पड़ता है।
मुझे लगता है कि अगर आप दिमाग में रखते भी हैं कि मुझे सिविल सर्विसेज (civil services) करना है, तो पहले आप अपनी स्कूल और कॉलेज (collage) की पढ़ाई पर ध्यान दें। अगर आप बहुत ज्यादा मोटिवेटेड (motivated) हैं, तो कॉलेज के फाइनल ईयर (final year) से इसकी तैयारी शुरू कर दें। लेकिन मेरे जैसे भी बहुत सारे लोग हैं जिन्हें काम करने के बाद यह फील (feel) होता है कि उस एग्जाम को देना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि एग्जाम को देने के लिए कोई ऐसा बैरियर (Barrier) है। आपका जब भी दृढ़ निश्चय हो कि मुझे इस एग्जाम (exam) को देना है आप तब से इसकी तैयारी में लग जाइए।

Ques : आने वाले सिविल सर्विसेज एस्प्रियंट (civil services aspirant) के लिए क्या मैसेज देंगी?

Ans : ये जो पूरी की पूरी एग्जाम (exam) है वो बेस्ड (based) है आपकी पर्सीवरेंस (perseverance) और कंसिस्टेंसी (consistency) और आपकी रेजलियंस (resilience) पर। हर दिन आप उठेंगे हर दिन आपको सेम न्यूज पेपर को (News paper) पढ़ना पड़ेगा। सेम रूटीन (same routine) होता है। कई महीनों तक कई साल तक और इमोशनल, मेंटल हेल्थ (emotional mental health) का बहुत ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि यह बहुत ही एक तनावपूर्ण प्रोसेस (process) भी हो जाता है।

एक डॉक्टर होने के नाते मैं यह सलाह दूंगी कि मानसिक, शारीरिक और इमोशनल (emotional) तीनों स्वास्थ्य का ध्यान रखें। स्वास्थ्य पहले है, बाकी सारी चीजें उसके एराउंड (Around) होती हैं। आप रोज चार-पांच घंटे ही पढ़े लेकिन उसको रोज पढ़े। 18 घंटे पढ़ने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। सारे लोगों से कट ऑफ (Cut off) होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है लेकिन कंसिस्टेंसी (Consistency) रखें।
कई बार आपको असफलता मिलती भी है, तो आप वापस से इस प्रोसेस (process) में भीड़ जाएं। साथ ही साथ मैंने कई लोगों को देखा है कि कई लोग 8-10 साल इस एग्जाम में निकालते हैं, तो मैं यह संदेश देना चाहूंगी की एक प्लान बी ( plan B) जरूर रखें, ऐसा मेरा पर्सनली (Personally) मानना है और दो या तीन या चार अटेम्प्ट (attempt) अगर आपके हो जाएं अच्छे तरीके से, तो आप जरूर अपना प्लान (plan) बी भी साथ में पूरा करें। उससे आपकी पर्सनैलिटी डेवलप (personality develop) होगी और थोड़ा उबाऊपन भी खत्म होगा। सिविल सर्विसेस (civil services) बहुत अच्छी सर्विस है, लेकिन मुझे लगता है कि बहुत सारे ऑप्शन और अपॉर्चुनिटी (opportunity) है, जहां बहुत अच्छा कर सकते हैं। मैं यही मैसेज देना चाहूंगी कि सपने सच होते हैं, इसलिए बस कड़ी मेहनत करते रहें और अपने लक्ष्य के लिए दृढ़ रहें।

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