Friday, June 21, 2024
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ज्ञान को जमीनी स्तर लागू करने की जरूरत: प्रो. आर. इंदिरा

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ज्ञान को जमीनी स्तर लागू करने की जरूरत: प्रो. आर. इंदिरा

गोरखपुर। ज्ञान को जमीनी स्तर पर लागू किए जाने की जरूरत है तभी इसकी भूमिका पब्लिक पॉलिसी में महत्वपूर्ण हो सकती है। समाजशास्त्रीय ज्ञान के माध्यम से सामाजिक वास्तविकता को समझा जा सकता है। समाजशास्त्र में अधिक साहस के साथ सत्य को उद्घाटित करने की क्षमता है, जिस पर कार्य किया जा सकता है। एक विषय के रूप में समाजशास्त्र अत्यन्त ही महत्वपूर्ण है, इसकी प्रासंगिकता निरंतर बनी हुई है। इसे मजबूती के साथ समसामयिक बनाए रखने का प्रयास करना होगा। समाजशास्त्रीय ज्ञान नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है। समाजशास्त्र के उपयोग से सामाजिक और आर्थिक नीतियों में संवेदनशीलता आएगी।


उक्त वक्तव्य दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के यूजीसी-एचआरडी सेंटर एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘समाजशास्त्र में उभरते प्रतिमान’ विषय आयोजित चौदह दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के समापन सत्र को सम्बोधित करते हुए इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसाइटी की पूर्व अध्यक्ष प्रो. आर. इंदिरा ने बतौर मुख्य अतिथि दिया।

कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए यूजीसी एचआरडी सेंटर के निदेशक प्रो. रजनीकान्त पाण्डेय ने कहा सामाज में हो रहे परिवर्तनों का विश्लेषण करके शिक्षक को उसके परिणामों से विद्यार्थियों को अवगत कराना होगा, जिससे विद्यार्थी समाज निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें। सामयिक परिवर्तनों के विश्लेषण में समाजशास्त्र विषय की भूमिका महत्वपूर्ण है। पुनश्चर्या कार्यक्रम के माध्यम से ज्ञान को विस्तार मिलता है, शिक्षक ज्ञान के नए आयामों से परिचित होता है।

कार्यक्रम समन्वयक एवं अध्यक्ष समाजशास्त्र विभाग प्रो. संगीता पाण्डेय ने चौदह दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम में हुए व्याख्यानों का विस्तृत विवरण देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में सात राज्यों से उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षक प्रतिभाग कर रहे थे।

इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के लगभग तीस से अधिक विषय विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान दिये और समाजशास्त्र की प्रांसगिकता और उभरती प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे कहा कि वैश्वीकरण के युग में समाजशास्त्र के अध्ययन का क्षेत्र बढ़ा है। डिजिटल दुनियां तक को इसमें समाहित किया गया है। समाजशास्त्र में अनेक नई प्रवृत्तियां उभरी हैं और अंतर्विषयक अध्ययनों को महत्व मिल रहा है।

कार्यक्रम का संचालन सह समन्वयक डॉ. मनीष पाण्डेय ने किया। आभार ज्ञापन डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह ने किया।


डॉ. निधि मिश्रा एवं डॉ. धनन्जय कुमार ने प्रतिभागियों के प्रतिनिधि रूप में फीडबैक दिया।
इस दौरान प्रो. कीर्ति पाण्डेय, प्रो. सुभी धुसिया, प्रो अंजू, डॉ. अनुराग द्विवेदी, डॉ. पवन कुमार, डॉ प्रकाश प्रियदर्शी समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 50 से अधिक प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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