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Thursday, December 1, 2022

शिक्षकों की गुणवत्ता से प्रखर राष्ट्र का निर्माणः पूर्व कुलपति प्रो0 राम अचल

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शिक्षकों की गुणवत्ता से प्रखर राष्ट्र का निर्माणः पूर्व कुलपति प्रो0 राम अचल

अध्यात्म को शिक्षा से जोड़ने की जरूरतः कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह

आचार्य विनोबा भावे का शिक्षा दर्शन और उसकी प्रासंगिकता विषय पर आयोजित हुई तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा विभाग एवं भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के संयुक्त संयोजन में आचार्य विनोबा भावे का शिक्षा दर्शन और उसकी प्रासंगिकता विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 राम अचल सिंह ने कहा कि आज की शिक्षा नागरिकों पर निर्भर करती है। नागरिकों की गुणवत्ता शिक्षकों पर, शिक्षकों की गुणवत्ता से उस राष्ट्र का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी राष्ट्र को आगे बढ़ाना है तो शिक्षा को श्रेष्ठता के उच्चतम शिखर पर ले जाना होगा। भारत के अनेक विद्वानों ने शिक्षा के बारे में अपने-अपने दर्शन दिए हैं। विनोबा भावे ने भूदान व सर्वोदय के संस्थापक थे सन 1916 में गांधी से मिले और उनके शिष्य बने। गांधी की मृत्यु के बाद भूदान एवं सर्वोदय आंदोलन शुरू किए। शिक्षा के लिए गांधी की जो बुनियादी धारणा थी उसको उन्होंने आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है पहला आंतरिक और दूसरा बाह्य शिक्षा। आंतरिक शिक्षा में का मतलब आत्मा की शिक्षा व आध्यात्मिक शिक्षा बाह्य है जो विद्यालयों में प्रचलित शिक्षा से आती है। भावे ने शिक्षा के लिए जो सूत्र दिए हैं उसमें शिक्षार्थी को ज्ञान का साधक, स्वतंत्र विचारक और उसके अंदर अच्छे विचार आने चाहिए। प्रो0 राम अचल ने गुरुकुल पद्धति के बारे में बताया कि एक अच्छी पद्धति है। लेकिन आजकल यह पद्धति व्यवहारिक नही हो पाएगी। उन्होंने कहा कि एक या दो गुरुकुल की बात करें तो वह संभव है लेकिन व्यापक स्तर पर गुरुकुल की बात करें तो यह संभव नहीं है। उन्होंने विनोबा का उद्रण देते हुए कहा कि हमें जो करना चाहिए उसे संकल्प के साथ करना चाहिए। इसी के साथ शिक्षक को अपने आचरण इस प्रकार रखना चाहिए उसका प्रभाव लोगों पर पड़े।

       कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह ने कहा कि विनोबा भावे व्यक्ति नही वे अपने आप में एक संस्था थे। उनके बताये हुए मार्ग पर चलने से हम सभी अपने जीवन का उद्धार कर सकेंगे। भावे शिक्षा को आध्यात्म से जोड़ना चाहते थे उनका कहना था कि किसी व्यक्ति के विचार, मनन व चिन्तन से वह इतना मजबूत होता है कि उसके आगे परमाणु एवं अणु बम कुछ नही कर सकता है। कुलपति ने कहा कि वर्तमान में सभी को शिक्षा प्राप्त करना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही अध्यात्म को शिक्षा से जोड़ने की जरूरत है। कुलपति ने कहा कि भावे ने शिक्षा को अंहिसक क्रांति का औजार माना था और कहना था कि परमाणु अस्त्रों से कही अधिक प्रभावकारी हमारे विचार होते है। इसलिए उन्होंने शिक्षा का प्रथम सूत्र योग अर्थात आध्यात्मिक ज्ञान को माना था। उनका कहना था कि आज की शिक्षा में योग का अभाव है। आध्यात्मिक एवं आत्मिक शक्ति पर मनुष्य बलवान एव तेजस्वी हो जाता है। उनका कहना था कि शिक्षा के द्वारा सहयोग की भावना का निर्माण होता है। जो बलवान है वह कमजोर तबका को आगे बढ़ने में सहयोग करे। एक सभ्य समाज का निर्माण करें।संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा विभाग, नई दिल्ली के प्रो0 जय प्रकाश दुबे ने आज से  बहुत साल पहले विनोबा भावे के आश्रम कुछ लोगों ने एक बात उठाई थी कि जमाना है क्रांति क्रांति क्रांति का परंतु उन्होंने कहा कि यह हिप्पोक्रेट कदम है। इससे हम बहुत पीछे चले जायेंगे। उन्होंने शांति शांति शांति की बात की। हमारा देश ऋषियों की परंपरा का देश है और हमारे कुछ शिक्षकों को देखकर लगता है कि यह परंपरा आज भी जारी है। शिक्षा में ज्ञान परंपरा दिखाई देती है। परंतु दुर्भाग्य है यह कार्य किसी राजनीतिज्ञ ने नहीं किया। यदि किया होता तो क्रांति और शांति में मतभेद न होता। हमने अपने जड़ से जुड़ी परंपराओं को तोड़कर कुछ नया पता लगाने की कोशिश में जड़ से जुड़ी शिक्षा की परंपरा को उसके संस्कारों से अलग कर शिक्षा को चलाने की कोशिश की और यही सबसे बड़ी हमारी गलती थी। शिक्षा कोई छोटा प्रयोग नहीं है। उत्तम जीवन और भविष्य का पासपोर्ट है। समस्या वहां से आना शुरू हुई जब हमने अपनी चीजों को रिकॉग्नाइज करना बंद कर दिया। शिक्षण संस्थानों में सवाल पूछने की परंपरा बंद होती जा रही है। गुरुकुल में जो व्यवस्था थी आज की शिक्षा संस्थानों में नहीं है। क्षमता का परिष्करण जरूरी है।

     संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि महाराजा रणजीत सिंह कॉलेज आफ प्रोफेशनल साइंसेज इंदौर के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो0 पुष्पेंद्र दुबे ने कहा कि मनुष्य का जन्म लेना ही कं्राति है और मनुष्य का दुनियां से चले जाना उससे बड़ी कं्राति है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलगीत सुनने के बाद कहा कि इसके प्रत्येक शब्द में विनोबा भावे परिलक्षित होते है। उन्होंने कहा कि विनोबा कहते है कि मेरी शिक्षा की छोटी-छोटी व्याख्या सतसंगति है और बड़ी-बड़ी से व्याख्या आत्म ज्ञान है। संगोष्ठी में प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा विभागाध्यक्ष एवं संगोष्ठी के संयोजक प्रो0 अनूप कुमार ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विनोबा ने अच्छी शिक्षा, महिला को स्वावलम्बन के लिए प्रशिक्षण दिए जाने के हिमायती थे उन्होंने व्यवसाय पर बल दिया था। आत्मनिर्भर एवं कौशल स्किल को बढ़ावा देना भावे के सोच का परिणाम रहा है। इस संगोष्ठी से निकले विचार आम जनमानस तक पहुॅचाया जायेगा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली सचिव प्रो0 कुमार रत्नम व विनोबा सेवा आश्रम, बस्तरा शाहजहांपुर के रमेश भैया ने आॅनलाइन संबोधित किया।      

          कार्यक्रम का शुभारम्भ माॅ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत छात्राओं द्वारा बैज अंलकरण से किया गया। विभाग की छात्राओं द्वारा कुलगीत की प्रस्तुति की गई। प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा विभागाध्यक्ष एवं संगोष्ठी के संयोजक प्रो0 अनूप कुमार एवं आयोजन सचिव डाॅ0 सुरेन्द्र मिश्र व सह आयोजन सचिव डाॅ0 विनोदिनी वर्मा ने अतिथियों को पुष्प गुच्छ, स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम भेटकर किया। संगोष्ठी के दौरान अतिथियों द्वारा प्रो0 अनूप कुमार की पुस्तक ग्रामीण विकास के आयाम का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन राजकीय महाविद्यालय चुग्घुपुर के डाॅ0 रवीश कुमार द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन सह आयोजन सचिव डाॅ0 विनोदिनी वर्मा ने किया।

      इस अवसर पर वित्त अधिकारी प्रो0 चयन कुमार मिश्र, कुलसचिव उमानाथ, मुख्य नियंता प्रो0 अजय प्रताप सिंह, प्रो0 नीलम पाठक, प्रो0 एसएस मिश्र, प्रो0 आशुतोष सिन्हा, प्रो0 राजीव गौण, प्रो0 एमपी सिंह, प्रो0 एसके रायजादा, प्रो0 आरके सिंह, प्रो0 के0 के0 वर्मा, प्रो0 फारूख जमाल, प्रो0 विनोद श्रीवास्तव, प्रो0 आर के तिवारी, प्रो0 गंगा राम मिश्र, प्रो0 शैलेन्द्र कुमार, डाॅ0 सुन्दर लाल त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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