अयोध्यालाइव

कुष्ठ के विरुद्ध आखिरी युद्ध में जुटा स्वास्थ्य विभाग

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest

Listen

Advertisements

− 2022 में कुष्ठ रोग को पूरी तरह से समाप्त करने का है लक्ष्य
− जिले में चल रहा है जागरुकता के लिए व्यापक अभियान

संतकबीरनगर(गोरखपुर) ‘‘कुष्ठ के विरुद्ध, आखिरी युद्ध’’ की थीम के साथ स्वास्थ्य विभाग स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान में जुटा हुआ है। वर्ष 2022 में कुष्ठ रोग को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य है। लोगों के अन्दर कुष्ठ रोग के प्रति जागरुकता पैदा करने के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. वी. पी. पांडेय ने बताया कि अपने या दूसरों की त्वचा पर दाग या सुन्न निशान हो तो इसकी अनदेखी न करें। नजदीकी अस्पताल पहुंचकर जांच कराएं। इसे छिपाने या टालने से कुष्ठ रोग दिव्यांगता का रूप ले सकता है । थोड़ी सी जागरुकता इस रोग से मुक्ति दिला सकती है। यह रोग हमारे शरीर के तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है। उपचार न कराने, उपचार में देरी करने या आधा-अधूरा उपचार कराने पर अंगों में विकृति ला देता है। कुष्ठ रोग लाइलाज नहीं है और कुष्ठ रोग का पूर्णत: उपचार संभव है। कुष्ठ रोगियों को स्पर्श करने से यह नहीं होता है। कुष्ठ रोगियों से भेदभाव न करें, उनके साथ समान व्यवहार और बर्ताव करें।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ इन्द्रविजय विश्वकर्मा ने बताया कि इस अभियान में आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जागरुक कर रहे हैं। कुष्ठ रोगियों के इलाज की हर सुविधा जिले में उपलब्ध है। जिले में 42 कुष्ठ रोगी हैं। समय समय पर उनको दवाइयों की निःशुल्क किट भी दी जाती है। इसके साथ ही विशेष प्रकार की चप्पलें भी दी जाती हैं ताकि उनके घावों पर खरोच आदि न लगे। उन्हें 2500 रुपए पेंशन भी दी जाती हैं।

दो प्रकार से हो रहा कुष्ठ का इलाज

कुष्ठ दो प्रकार को होता है । पहला पॉसी-बैसीलरी कुष्ठ रोग जिसमें त्वचा पर एक से लेकर पांच दाग धब्बे होते हैं ।  इसका उपचार छह माह तक राइफैम्पिसिन और डैप्सोन से किया जाता है। दूसरा मल्टी-बैसीलरी कुष्ठ रोग जिसमें त्वचा पर पांच से अधिक दाग होते हैं। इसका उपचार 12 माह तक राइफैम्पिसिन, क्लॉफैजिमाइन और डैप्सोन से किया जाता है। दवा खाने में अगर किसी प्रकार की परेशानी हो तो कुष्ठ रोग विभाग में सम्पर्क किया जा सकता है।
 
इलाज में देरी से आ सकती है विकलांगता

ADVERTISEMENT

जिला कुष्ठ रोग अधिकारी ने बताया कि इस रोग के संक्रमण का कारण बैक्टीरिया माईकोबैक्टीरियम लेप्री है। यह संक्रमण रोगी की त्वचा को प्रभावित करता है तथा रोगी की तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचाता है। यह रोग आंख और नाक में समस्याएं पैदा कर सकता है। कुष्ठ रोग से डरें नहीं, कुष्ठ रोगियों के साथ सामान्य रोगियों की तरह व्यवहार करें। कुष्ठ रोग का उपचार संभव है, लेकिन इलाज में देरी होने से दिव्यांगता हो सकती है।

यह है कुष्ठ रोग के लक्षण

डॉ वी पी पाण्डेय बताते हैं शरीर पर किसी प्रकार के दाग या धब्बे जो त्वचा के प्राकृतिक रंग से अलग हों, दाग या धब्बे का सुन्न होना, शरीर की नसों का मोटा होना, हाथ व पैर में सुन्न का अहसास होना, अंगुलियां टेढ़ी मेढ़ी होने के साथ ही शरीर का कोइ अंग ताप या ठण्ड के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाना कुष्ठ रोग के लक्षण हैं ।

Advertisements

Related News

Leave a Reply

JOIN TELEGRAM AYODHYALIVE

Currently Playing
Coming Soon
देश का सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री कौन रहा है?
देश का सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री कौन रहा है?
देश का सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री कौन रहा है?

Our Visitor

112027
Users Today : 108
Total Users : 112027
Views Today : 130
Total views : 143935
May 2022
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
Currently Playing
May 2022
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  

OUR SOCIAL MEDIA

Herbal Homoea Care

Also Read

%d bloggers like this: